जमुई : सदर अस्पताल स्थित ब्लड जांच केंद्र अपने विश्वसनीयता की रिपोर्ट को लेकर लोगों के बीच चर्चा में बना हुआ है. जांच केंद्र कर्मी द्वारा एक महिला मरीज को अलग-अलग समय में किए गए जांच के दौरान अलग-अलग रिपोर्ट दिया गया जो हैरानी भरा है.
जानकारी देते हुए झाझा निवासी फरजाना खातून तथा शाहिना खातून जो रिश्ते में अपना ननद -भाभी लगती है उसने बताया कि बेहतर प्रसव को लेकर हम दोनों मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में महिला चिकित्सक की सलाह पर अन्य जांच के साथ-साथ बीते 26 जून 2019 को खून जांच भी करवाई. कर्मी द्वारा हम दोनों के ब्लड का ग्रुप बी पॉजिटिव बताया गया. पुनः जब 11 नवंबर 2019 तथा 16 जनवरी 2020 को जांच करायी तो कर्मी द्वारा पर्ची पर बी नेगेटिव दिया गया.
जिससे हम लोग हैरान हैं. महिला मरीज ने बताया कि सदर अस्पताल के लिए कोई नई बात नहीं है. इसके पूर्व भी कई मरीजों को उक्त कर्मी द्वारा इसी तरह की जांच रिपोर्ट दिया गया . जिसे लेकर ऐसी महिला के बीच असमंजस की स्थिति है. उसने बताया कि अब हम लोग भी हैरानी में हैं कि आखिर किस ग्रुप को सही माने.
प्रसव के समय महिला चिकित्सक द्वारा खून की कमी होने को लेकर ब्लड लिखा जायेगा तो आखिर किस ग्रुप का हमलोग ब्लड लेंगे समझ में नहीं आ रहा . उसने बताया कि इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन को भी जानकारी दिया गया.लेकिन हम लोग का सही ब्लड ग्रुप की पहचान नहीं हो पाया.
अब लगता है निजी जांच केंद्र में जांच कराकर ही सही पहचान हो सकती है. मरीज ने बताया कि शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कहता है, लेकिन होता कुछ नहीं.
आखिर मरीज के साथ ऐसी नाइंसाफी कब तक होती रहेगी. महिला मरीज ने जिले के वरीय पदाधिकारी से हस्तक्षेप कर रोगियों के लिए न्याय की मांग भी किया.उसने बताया कि सरकार सुरक्षित प्रसव को लेकर बीते कई वर्षों से कई योजनाओं का संचालन कर रही है. लेकिन ब्लड जांच कर रहे कर्मी द्वारा इस तरह का उल्टा रिपोर्ट देना कहीं से शोभा नहीं दे रहा .
पंजी पर नहीं लिखा जाता है मरीज का पूरा पता
महिला मरीज ने बताया कि ब्लड जांच करने वाले कर्मी द्वारा पंजी पर मरीज का सिर्फ नाम ही लिखा जाता है. उसका पूरा पता नहीं लिखा जाता. जिसे लेकर जांच रिपोर्ट लेने में परेशानी होती है. उसने बताया कि एक ही नाम के कई व्यक्ति होते हैं लेकिन कर्मी के द्वारा पूरा पता नहीं लिखे जाने से कभी-कभार अफरा-तफरी का भी माहौल पैदा हो जाता है. महिला मरीज ने टेक्नीशियन की योग्यता पर भी सवाल उठाते हुए इसमें सुधार करने की भी मांग किया.
प्रसव के लिए महिला को किया रेफर
जमुई. सदर अस्पताल में एक महिला मरीज के शरीर में नौ ग्राम खून रहने पर मंगलवार को महिला चिकित्सक द्वारा बेहतर प्रसव के लिए रेफर कर दिया गया.
लखीसराय जिले के कुंदर निवासी गौतम कुमार ने बताया कि सुरक्षित प्रसव को लेकर सुबह पत्नी सीता देवी को सदर अस्पताल जमुई में भर्ती कराया. आवश्यक जांच के बाद ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक डा. रीता उपाध्याय ने खून जांच कराने की सलाह दिया. मौजूद कर्मी ने उसके शरीर में नौ ग्राम खून होने की बात कही.
इसके बावजूद भी उक्त महिला चिकित्सक खून की कमी बताकर बेहतर प्रसव के लिए मेरी पत्नी को पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया. गौतम ने बताया कि सर्वप्रथम चिकित्सक को आवश्यक जांच करके खून लाने की बात कहा जाता. अगर मैं लाने में असमर्थ होता तो रेफर करते. उसने बताया कि बेहतर तरीके से प्रसव को लेकर पत्नी को सदर अस्पताल, जमुई को लेकर भर्ती कराया.
लेकिन यहां आने के बाद आशा से विपरीत कार्य हुआ. इस बाबत पूछे जाने पर डीएस डा अहमद ने बताया कि सिजेरियन ऑपरेशन के लिए महिला मरीज में नौ ग्राम खून का होना पर्याप्त है. बावजूद अगर महिला चिकित्सक द्वारा रेफर किया गया है तो पूरी जानकारी लेकर ही न्याय संगत कार्रवाई किया जायेगा.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डा. नौशाद अहमद बताते हैं कि एक ही मरीज के अलग-अलग जांच रिपोर्ट के बारे में मुझे जानकारी नहीं है.उन्होंने बताया कि अगर ऐसा हुआ है तो बिल्कुल गलत है.पूरी जानकारी के बाद ही दोषी व्यक्ति के खिलाफ अवश्य कार्रवाई किया जायेगा.
