औषधि नियंत्रण प्रशासन की अपडेट सूची से 165 दवा दुकानें गायब

जमुई : सदर अस्पताल स्थित औषधि नियंत्रण प्रशासन की अपडेट सूची से वर्तमान में 165 दवा दुकान नहीं है. जानकारी के अनुसार सरकार के द्वारा विभाग की कार्यों पर नजर रखने के लिए एक कार्यालय की स्थापना किया गया है. जिसमें एक अधिकारी का भी पदस्थापन किया गया है. इसके साथ ही अन्य कर्मी की […]

जमुई : सदर अस्पताल स्थित औषधि नियंत्रण प्रशासन की अपडेट सूची से वर्तमान में 165 दवा दुकान नहीं है. जानकारी के अनुसार सरकार के द्वारा विभाग की कार्यों पर नजर रखने के लिए एक कार्यालय की स्थापना किया गया है. जिसमें एक अधिकारी का भी पदस्थापन किया गया है. इसके साथ ही अन्य कर्मी की विभाग के कार्य को बेहतर तरीके से संचालन की जिम्मेदारी भी तय किया गया है.

लेकिन लोगों की माने तो सदर अस्पताल स्थित औषधि नियंत्रण प्रशासन इससे बिल्कुल अलग है और इसी का परिणाम है कि विभाग की अपडेट सूची से जिले के 165 दवा दुकान गायब हैं. जबकि निर्गत किये गये लाइसेंस की संख्या करीब 600 है. लोग बताते हैं कि जिस तरह से शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में दवा दुकानों की संख्या बढ़ता जा रहा है विभाग का आंकड़े भरोसे के लायक नहीं हैं.
विभाग की मानें तो वरीय पदाधिकारी के द्वारा लगातार क्षेत्र में लाइसेंसी दवा दुकानों की जांच पड़ताल भी किया जा रहा है और दोषी पाये जाने वालों पर कार्रवाई भी किया जा रहा है. लेकिन वर्तमान में दवा दुकानों तथा विभाग के पदाधिकारियों के मेलजोल से विभाग के नियमों को नजरअंदाज होते भी देखने को मिल रहा है.
दवा दुकान के लाइसेंस को लेकर है प्रावधान
वर्तमान में औषधि निरीक्षक के पद पर स्थापित केके शर्मा बताते हैं कि सरकार द्वारा दवा के लाइसेंस को लेकर बनाया गया अधिनियम वर्षों पुराना है. जो आजादी के पहले का है. औषधि निरीक्षक ने बताया कि हालांकि आम लोगों के हित को लेकर समय-समय पर इसमें संशोधन भी किया जाता है उन्होंने बताया कि विभाग के द्वारा दो तरह के लाइसेंस निर्गत किया जाता है.
पहला थोक एवं दूसरा खुदरा. औषधि निरीक्षक ने बताया कि थोक लाइसेंस के लिए संबंधित व्यक्ति को अपना शैक्षणिक योग्यता, आवासीय प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, आवश्यक फोटो, किरायानामा नंबर, फ्रिज की जानकारी, जमीन का रसीद, आधार कार्ड, अनुभव प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक कागजात देना जरूरी होता है.
खुदरा दुकान लाइसेंस के लिए शैक्षणिक योग्यता, आवासीय प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, फोटो, किरायानामा, पैन कार्ड, फ्रीज का कागज, जमीन की रसीद, फार्मासिस्ट का विवरण, नवीनीकरण, सहमति एवं शपथ पत्र तथा आधार कार्ड जरूरी है. उन्होंने बताया कि आवेदन के बाद उक्त कागजातों की जांच एवं स्थलीय निरीक्षण भी किया जाता है. बाद में वरीय पदाधिकारी के निर्देशानुसार लाइसेंस पांच वर्षों के लिए निर्गत किया जाता है.
कहते हैं औषधि निरीक्षक
इस बाबत जिला औषधि निरीक्षक केके शर्मा ने बताया कि निर्गत लाइसेंस को शीघ्र ही अपटूडेट की सूची में शामिल कर लिया जायेगा. दवा व्यवसाय आम लोगों के जीवन से जुड़ा है. इसे लेकर पूरी सतर्कता के साथ विभाग के द्वारा कार्य किया जा रहा है. शिकायत मिलने एवं आवश्यक जांच के बाद दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई भी किया जा रहा है.

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