महंगाई की मार से बिगड़ा रसोई का बजट, दो माह में चीनी 45 से 70 व प्याज 25 से बढ़कर 80 रुपये किलो तक पहुंचा

महंगाई की मार से रसोई का बजट बुरी तरह बिगड़ गया है. पिछले दो महीनों में चीनी, प्याज, लहसुन और दालों जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल आया है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह महंगाई कमर तोड़ साबित हो रही है.

Rising Food Prices (Hajipur) : खाद्य पदार्थों के दाम में हो रही बेतहाशा वृद्धि का असर अब लोगों की जेब पर पड़ने लगा है. रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग होने वाली सामग्रियों के दाम बढ़ने से आम लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महंगाई की मार कमर तोड़ रही है. स्थानीय बाजारों में पिछले दो महीने के दौरान चीनी समेत अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में करीब डेढ़ गुना तक वृद्धि दर्ज की गयी है. 40 से 45 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है. बढ़ती कीमतों के कारण लोग चीनी का इस्तेमाल तक कम करने लगे हैं.

प्याज ने रसोई का बजट बिगाड़ा

पिछले दो महीने में दाल, चावल, आटा, सरसों तेल और रिफाइंड समेत कई खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हुई है. वहीं प्याज के बढ़ते भाव ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है. दो माह पूर्व 20 से 25 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज वर्तमान में 75 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. बढ़े दाम के कारण मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों की थाली से प्याज गायब होने के कगार पर है.

लहसुन भी 140 रुपये किलो पहुंचा

दो माह पूर्व 80 रुपये प्रति किलो बिकने वाला लहसुन अब 140 रुपये प्रति किलो की दर से बाजार में मिल रहा है. खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों का असर लोगों की रसोई पर साफ दिखने लगा है. सीमित आमदनी वाले परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों में भी कटौती करनी पड़ रही है.

कारोबारी पर मुनाफाखोरी का आरोप

कुंदन कुमार, समाजसेवी ने कहा कि दो महीने में खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि होने से लोगों की जेब पर असर पड़ना शुरू हो गया है. सरकार की ढुलमुल नीति के कारण बड़े कारोबारी माल को गोदामों में छिपाकर ऊंचे दाम पर सामान बेच रहे हैं. इससे खासकर किसान और मध्यम वर्गीय परिवार प्रभावित हो रहे हैं.

सरकार और प्रशासन से मूल्य नियंत्रण की मांग

संगीता देवी, गृहिणी ने कहा कि दो माह पूर्व 20 से 25 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अभी 80 रुपये किलो बिक रहा है. दाम बढ़ने से प्याज अब लोगों की रसोई से गायब हो रहा है, लेकिन इस पर न तो सरकार कुछ कर रही है और न ही प्रशासन कुछ बोल रहा है. सरकार को मूल्य नियंत्रण के लिए पहल करनी चाहिए.

सामानों के दाम में वृद्धि का तुलनात्मक आंकड़ा

सामग्रीपुराना दामनया दाम
चना दाल75 रुपये/किलो85 रुपये/किलो
चीनी45 रुपये/किलो70 रुपये/किलो
सरसों तेल160 रुपये/लीटर175 रुपये/लीटर
रिफाइंड165 रुपये/900 ग्राम145 रुपये/750 ग्राम
मैदा32 रुपये/किलो35 रुपये/किलो
आटा (आशीर्वाद)48 रुपये/किलो50 रुपये/किलो
गरम मसाला1,400 रुपये/किलो1,800 रुपये/किलो
प्याज20 रुपये/किलो80 रुपये/किलो
गुड़50 रुपये/किलो80 रुपये/किलो

किसानों की परेशानी भी बढ़ी

बिट्टू कुमार, समाजसेवी ने कहा कि महंगाई बढ़ने के लिए सरकार और सरकार में बैठे बड़े नेता और मंत्री जिम्मेदार हैं. व्यापारी और कंपनियों द्वारा बाजार में लाए जाने वाले सामानों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन किसानों द्वारा उत्पादित गेहूं, धान, मक्का और आलू आदि की कीमत स्थिर है. महंगाई बढ़ने से किसानों की परेशानी भी बढ़ रही है.

पेट्रोल की कीमत का भी असर

अरविंद कुमार, युवा ने कहा कि रोजमर्रा की जरूरत वाले सामानों के दाम काफी बढ़ गये हैं. पेट्रोल की कीमत बढ़ने के कारण अन्य सामानों के दाम भी बढ़ रहे हैं. तेल, दाल समेत अन्य जरूरी सामान महंगे होने से मजदूर वर्ग के लोगों की परेशानी बढ़ रही है. सरकार ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है.

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By गोपाल कुमार राय

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