वैशाली के पातेपुर से हृदय विदारक घटना सामने आई है. नगर पंचायत स्थित पोखर के पास रहनेवाले खानाबदोश समाज के एक युवक की संदिग्ध मौत हो गयी. पैसे के अभाव में लगभग 18 घंटे तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया. रविवार की शाम स्थानीय समाजसेवी के पहल पर बीडीओ ने नगर पंचायत के ईओ से बात कर अंत्येष्टि का प्रबंध कराया, जिसके बाद शव को जेसीबी की मदद से दफना दिया गया.
मृतक मध्य प्रदेश के रीवा जिला के दभोरा गांव निवासी लेवन सिंह का 22 वर्षीय पुत्र बब्बू सिंह है. घटना के बाद स्थानीय लोगों में काफी जोरों पर चर्चा हो रही है.
15 दिन पूर्व हुई थी बब्बू की शादी
बताया गया कि बब्बू की शादी 15 दिन पूर्व दरभंगा में हुई थी. वह अपनी पत्नी तथा दो छोटी बहन एवं एक भाई के साथ पातेपुर बाजार स्थित पोखर के पास तंबू में रहकर जड़ी बूटी बेचता था. बताया गया कि उसके कई अन्य साथ भी आसपास ही रहते थे. इसी दौरान तीन-चार दिन पूर्व उसकी एक बहन प्रेम प्रसंग में किसी के साथ भाग गयी थी जिसका सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सका और बीमार पड़ गया.
स्थानीय एंबुलेंस चालक मो इस्ताक ने उसे पातेपुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से रेफर किए जाने के बाद उसे महुआ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहीं इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. युवक की मौत के बाद उसके सभी साथी तंबू लेकर फरार हो गए. पत्नी एवं बहन शव लेकर डेरा लौट गए.
अंतिम संस्कार के लिए पत्नी के पास नहीं थे रुपए
मृतक की पत्नी ने बताया कि शनिवार की देर रात दो बजे के करीब पति की मौत के बाद शव लेकर घर आई थी. उसके पास कफन खरीदने एवं शव का अंतिम संस्कार के लिए न पैसे थे और न कोई मदद करने वाला था. इसके कारण वह 18 घंटे तक शव को लेकर बैठी रही. रविवार की शाम वह अपने देवर एवं ननद के साथ शव को ई-रिक्शा पर लेकर श्मशान पहुंची. वहीं पर शव रखकर लगभग चार घंटे तक रोती रही. लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया.
इसी दौरान एक स्थानीय पत्रकार ने महिला से पूछताछ के बाद बीडीओ डॉ दीपक कुमार से बात की. बीडीओ ने नगर पंचायत की ईओ दीप शिखा से बात कर शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए सहयोग करने की अपील की.
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ईओ ने सरकारी राशि से कराया शव का अंतिम संस्कार
ईओ दीप शिखा ने तत्काल अपने प्रतिनिधि को मौके पर भेजा तथा जेसीबी की मदद से शव को दफनाया गया. इस दौरान काफी संख्या में लोग मौके पर जुट गए. इस संबंध में बीडीओ दीपक कुमार ने बताया कि मानवता से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है. पैसे के अभाव में किसी की अंत्येष्टि रुक जाए, यह मानव समाज के लिए काफी निंदनीय है.
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