वैशाली के महनार में शोभाजान स्लुईस गेट पर तकरार: रबी सिंचाई के लिए गेट खोलने की मांग, मक्का डूबने के डर से विरोध

वैशाली के महनार में शोभाजान नहर पर स्लुईस गेट खोलने को लेकर किसानों में गहरा विवाद है. एक पक्ष रबी फसल की तैयारी के लिए पानी चाहता है, तो दूसरा पक्ष मक्का की फसल डूबने की आशंका से विरोध कर रहा है.

महनार (वैशाली). प्रखंड क्षेत्र की वासुदेवपुर चंदेल पंचायत स्थित शोभाजान नहर पर बने स्लुईस गेट को खोलने को लेकर किसानों के दो गुट आमने-सामने आ गए हैं. एक पक्ष रबी फसल की तैयारी और चौरी में पानी पहुंचाने के लिए गेट खोलने की पुरजोर मांग कर रहा है, तो दूसरा पक्ष खेतों में खड़ी मक्का की फसल डूबने की आशंका जताते हुए इसका कड़ा विरोध कर रहा है. विवाद की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को अनुमंडल कृषि पदाधिकारी अविनाश कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी शुभम साचन, राजस्व पदाधिकारी पूजा राय और जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता सोनू कुमार ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया.

रबी की बुआई के लिए पानी जरूरी

निरीक्षण के दौरान जुटे करीब सौ किसानों ने अधिकारियों से तुरंत स्लुईस गेट खोलने की गुहार लगाई. बलवीर सिंह, टुनटुन सिंह, हरेन्द्र सिंह, अखिलेश पासवान, अजय सिंह समेत अन्य किसानों का तर्क है कि चौरी में समय पर पानी नहीं पहुंचा तो खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बनेगी, जिससे आगामी रबी फसल की बुआई और सिंचाई बुरी तरह प्रभावित होगी. किसानों ने कहा कि समय रहते जलस्तर बनाए रखना खेती के हित में बेहद जरूरी है.

मक्का की फसल डूबने का सता रहा डर

वहीं दूसरी तरफ, कृष्ण कुमार सिंह, कृष्णा राय, अखिलेश सिंह और पुनीत राय ने प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर गेट खोले जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. इन किसानों का कहना है कि स्लुईस गेट खोलते ही पानी का बहाव निचले खेतों की ओर बढ़ जाएगा, जिससे वर्तमान में खेतों में लहलहा रही मक्का की फसल पूरी तरह जलमग्न हो जाएगी. उन्होंने बिना तकनीकी मुआयना और खेतों की स्थिति का आकलन किए गेट खोलने पर भारी आर्थिक नुकसान की चेतावनी दी है.

महनार के वासुदेवपुर चंदेल स्थित शोभाजान नहर पर बने स्लुईस गेट का स्थलीय मुआयना करते प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारी.

दोनों पक्षों के बीच फंसा तकनीकी पेच

शोभाजान नहर का यह विवाद वर्तमान और भविष्य की खेती की प्राथमिकताओं के बीच उलझ गया है. एक तरफ किसानों को आने वाली रबी फसल के लिए नमी की चिंता है, तो दूसरी तरफ महीनों की मेहनत से तैयार मक्का को बचाने की चुनौती है. किसानों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसका मानना है कि जल संसाधन विभाग को पानी के प्रवाह और निकास का तकनीकी स्तर तय करना चाहिए, ताकि मक्का को डूबने से बचाते हुए रबी के लिए भी सीमित पानी छोड़ा जा सके.

समाधान के लिए प्रशासनिक फैसले की दरकार

अधिकारियों द्वारा नहर, स्लुईस गेट और आसपास के चौर क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण किए जाने के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन के फैसले पर टिक गई हैं. दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें और चिंताएं अधिकारियों के समक्ष रख दी हैं. किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन जलस्तर और निकासी क्षमता का संतुलित आकलन कर ऐसा बीच का रास्ता निकालेगा, जिससे मक्के की फसल भी सुरक्षित रहे और आगामी बुआई के लिए किसानों को जलसंकट का सामना न करना पड़े.

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By Prabhat khabar news desk

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