Hajipur News: वैशाली जिले के महनार अनुमंडल क्षेत्र में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी ला दी गई है. दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है, जिसे देखते हुए पीड़ितों को सुरक्षित रखने और उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं. महनार अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अंकित कुमार ने बताया कि प्रभावित नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, शुद्ध पेयजल और सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए अनुमंडल के सभी संबंधित प्रखंडों में पुख्ता प्रशासनिक बंदोबस्त किए गए हैं.
देसरी, सहदेई बुजुर्ग और महनार प्रखंड में कम्युनिटी किचन संचालित
बाढ़ पीड़ितों की सुविधा के लिए अनुमंडल के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोइयों (कम्युनिटी किचन) का सुचारू संचालन किया जा रहा है. देसरी प्रखंड अंतर्गत आजमपुर पंचायत के वार्ड संख्या 12 (खड़गपुर) में संचालित सामुदायिक रसोई में रविवार सुबह तक 496 बाढ़ प्रभावित लोगों को ताजा और पौष्टिक भोजन कराया गया. इसी क्रम में सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के नयागंज हाट और नयागांव पश्चिम में स्थापित दो अलग-अलग सामुदायिक रसोइयों के जरिए अब तक 850 से अधिक विस्थापित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है. इसके अतिरिक्त महनार नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 21 (देशराजपुर) एवं वार्ड संख्या 20 (जहाज घाट के समीप स्थित सामुदायिक भवन) में नई रसोई शुरू की जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के अलीपुर हट्टा एवं हसनपुर दक्षिणी में भी नियमित रूप से भोजन वितरण जारी है.
चमरहरा स्कूल में विस्थापितों के लिए राहत शिविर और मवेशियों को चारा
बाढ़ के पानी के कारण बेघर हुए विस्थापित परिवारों के रहने के लिए जगदीश उच्च माध्यमिक विद्यालय, चमरहरा पंचायत में पूर्ण सुसज्जित राहत शिविर स्थापित किया गया है. इस शिविर में विस्थापित परिवारों के सुरक्षित आवासन, स्वच्छता और दोनों समय भोजन का समुचित प्रबंध किया गया है. सभी राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई केंद्रों पर चिकित्सकों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं, जो पीड़ितों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरी दवाएं दे रही हैं. इसके साथ ही पशुपालन विभाग के सहयोग से बाढ़ प्रभावित इलाकों के मवेशियों के लिए पर्याप्त सूखा चारा, हरा चारा और पशु चिकित्सा व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जा रही है.
तीन प्रखंडों में 18 निबंधित नावों का परिचालन, आवागमन सुगम
जलमग्न हो चुकी सड़कों और टापू बने टोलों में फंसे लोगों के आवागमन के लिए कुल 18 निबंधित सरकारी नावों का परिचालन कराया जा रहा है. सहदेई बुजुर्ग प्रखंड में छह नावें लगाई गई हैं, जिनमें गनियारी क्षेत्र में पांच और नयागांव क्षेत्र में एक नाव सक्रिय है. महनार प्रखंड के विभिन्न जलमग्न इलाकों में नौ नावें निरंतर सेवा दे रही हैं, जबकि नगर परिषद क्षेत्र के फतेहपुर कमाली के निकट भी नाव की व्यवस्था की गई है. वहीं देसरी प्रखंड की आजमपुर पंचायत में तीन संवेदनशील मार्गों पर नाव का संचालन हो रहा है, जिसमें वार्ड सात टोक्करपुर बांध से नगीना पासवान के घर तक, वार्ड 12 में पुराने पुल से पिंटू राम के घर तक और वार्ड 13 में रंजीत राय की दुकान से पांचु राय के दलान तक ग्रामीणों को सुरक्षित नाव सुविधा दी जा रही है.
संवेदनशील घाटों पर मजिस्ट्रेट प्रतिनियुक्त, तटबंधों की सुरक्षा सख्त
अनुमंडल प्रशासन द्वारा गंगा नदी के सभी संवेदनशील घाटों और तटबंधों की सुरक्षा के लिए दंडाधिकारियों (मजिस्ट्रेट) एवं पुलिस पदाधिकारियों की विशेष प्रतिनियुक्ति की गई है. एसडीओ अंकित कुमार ने बताया कि संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को जलस्तर की हर घंटे मॉनिटरिंग करने और संवेदनशील तटबंधों पर लगातार गश्त लगाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने दोहराया कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता हर पीड़ित तक समय पर भोजन, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा सहायता, पॉलीथिन शीट्स और नाव की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आपदा के इस दौर में किसी भी नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े.
