हाजीपुर में मनायी गयी मुंशी प्रेमचंद की जयंती, रंगकर्मियों ने याद किया कथा सम्राट का साहित्यिक योगदान

हाजीपुर में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती को बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया. इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में साहित्यकारों और रंगकर्मियों ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान और उनकी कहानियों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए.

Hajipur News: निर्माण रंगमंच के तत्वावधान में शुक्रवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनायी गयी. स्थानीय गांधी स्मारक पुस्तकालय स्थित जगदीशचंद्र माथुर मंच पर आयोजित कार्यक्रम में रंगकर्मियों और साहित्य प्रेमियों ने प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी क्षितिज प्रकाश ने की, जबकि संचालन वीरभूषण यादव ने किया. इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य और उनकी कहानियों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे.

प्रेमचंद की कहानियों में नाट्य तत्व की भरमार : यशवंत राज

युवा रंगकर्मी यशवंत राज ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में नाट्य तत्वों की भरमार है. उनकी रचनाएं आज भी समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करती हैं और रंगमंच के लिए अत्यंत उपयोगी हैं.

पात्रों में दिखता है जीवन का यथार्थ

विवेक यादव ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों के पात्र इतने जीवंत हैं कि उन्हें मंच पर प्रस्तुत करते समय ऐसा लगता है मानो वास्तविक जीवन को जी रहे हों. उनकी रचनाएं सामाजिक यथार्थ का सशक्त दस्तावेज हैं.

अभावों के बीच किया महान साहित्य सृजन

वीरभूषण यादव ने कहा कि प्रेमचंद ने कठिन परिस्थितियों और अभावों के बीच रहकर भी साहित्य सृजन का कार्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया. उन्होंने बताया कि निर्माण रंगमंच ने प्रेमचंद की कई कहानियों का देशभर में सफल मंचन किया है.

रंगमंच को प्रेमचंद की कहानियों से मिला सहारा

अध्यक्षीय संबोधन में क्षितिज प्रकाश ने कहा कि रंगमंच के शुरुआती दिनों में जब नाटकों का अभाव महसूस हुआ, तब प्रेमचंद की कहानियां ही सबसे बड़ा सहारा बनीं. उन्होंने कहा कि आज भी उनकी कहानियों पर आधारित कई नाटकों का सफल मंचन किया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि दो अगस्त को इसी मंच पर प्रेमचंद की कहानी पर आधारित नाटक "खुचड़" का मंचन किया जाएगा.

कई रंगकर्मी रहे मौजूद

कार्यक्रम के अंत में अनुप्रिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस अवसर पर सुधांशु कुमार, किरण, रंधीर, सुधीर कुमार, सुरेंद्र कुमार, रंजीत कुमार, विट्ठलनाथ सूर्य सहित कई रंगकर्मी और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे.


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By Devendra gupt

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