गोरौल सीएचसी में इमरजेंसी एवं ट्रामा सेंटर स्थापित होने के बाद भी नहीं दूर हुई डॉक्टर और कर्मी की समस्या

हाजीपुर-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग एनएच 22 के किनारे स्थित सीएचसी का उद्घाटन तीन वर्ष पूर्व किया गया.

कौशल किशोर सिंह, प्रेमराज (गोरौल). हाजीपुर-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग एनएच 22 के किनारे स्थित सीएचसी का उद्घाटन तीन वर्ष पूर्व किया गया. उसके बाद लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए इसी वर्ष उसी अस्पताल परिसर में इमरजेंसी एवं ट्रामा सेंटर की स्थापना की गयी. लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से निर्मित इस सेंटर में ऐसे तो कहने को बहुत सारी सुविधाएं हैं. लेकिन यहां की जनता को अब भी बहुत सारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. जिसकी व्यवस्था निश्चित रूप से अस्पताल में होनी चाहिए थी. सुविधा उपलब्ध नहीं रहने के कारण इलाज कराने पहुंचे लोगों को निजी क्लिनिक ही एक मात्र सहारा बनकर रह गयी है. हालांकि ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को इलाज कर दवा दी जा रही है. बताया गया कि यहां आज भी आंख, हड्डी, नस रोग का इलाज नहीं हो पाता है. एनेस्थीसिया कर्मी व महिला सर्जन की कमी के अभाव में महिलाओं की शल्य चिकित्सा नहीं हो पाती है. उन्हें इलाज के लिए निजी क्लिनिक का सहारा लेना पड़ता है. गंभीर बीमारियों के इलाज के सुविधा के अभाव में दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है. इमरजेंसी ट्रामा सेंटर बनने के बाद भी यहां चिकित्सकों की कमी, स्वास्थ्य जांच, स्वास्थ्य कर्मी की कमी है. अस्पताल में एक भी ड्रेसर तैनात नहीं रहने के कारण गार्ड ड्रेसर व कंपाउंडर का काम करते हैं. डॉक्टर और कर्मियों की है कमी : प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर 04 पद स्वीकृत है, चारों पदस्थापित है. नर्स की 33 पद स्वीकृत है जिसमे 25 पदस्थापित है, 08 पद रिक्त है. जीएनएम के स्वीकृत 08 पदों पर सभी पदस्थापित है. बताया कि फार्मासिस्ट और ड्रेसर का एक-एक पद स्वीकृत है. दोनों का पद खाली है. जिसके कारण परेशानी होती है. वहीं इस अस्पताल में आंख का डॉक्टर, नस का डॉक्टर, हड्डी रोग विशेषज्ञ और महिला सर्जन डॉक्टर की कमी है. अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे नहीं होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. जिसके कारण इलाज कराने पहुंच रहे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अस्पताल में उपलब्ध सेवाएं : 30 बेड के इस अस्पताल में ऑक्सीजन, ओपीडी में 261 प्रकार की दवा, ट्रामा सेंटर में 65 प्रकार की दवा, तीन एंबुलेंस, ओपीडी में अल्ट्रासाउंड, इमरजेंसी एक्स-रे आदि की व्यवस्था है. इसके साथ ही बीपी, ब्लड शुगर, सीवीसी, लीवर जांच, एचआईवी, एसजीपीटी, एचबीएसएजी, भीडीआरएल, एचबी, मलेरिया, डेंगू, यूरीन रूटीन, प्रेगनेंसी, ब्लड शुगर, फाइलेरिया, क्रिएटीनाईन, एस बिलिरुबिन, एल्बुमिन, एल्कालाइन फास्फेट, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल, ब्लड ग्रुप, यूरिया, टोटल प्रोटीन, टीबी, कालाजार, एसजीओटी, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल, एमाईलेज, आरएफ क्वांटिटी आदि जांच की व्यवस्था है. इसके अलावे अस्पताल में बीसीजी, हेपिटाइटिस-बी, कुत्ता-बंदर और बिल्ली के काटने पर रैबिज और सांप काटने का वैक्सीन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. डॉक्टर शुभांगी प्रिया ने बताया कि यहां सांप काटने की वैक्सीन स्नैक वाइट उपलब्ध है. गांव के लोग झार-फुंक के चक्कर में पड़कर मरीज को खो देते हैं. मरीजों को वैक्सीन देने के बाद जल्द ही रिकवर हो जाता है, लेकिन एक समस्या है यहां पर आए दिन इमरजेंसी में कार्यरत महिला चिकित्सक एवं पुरुष चिकित्सक को स्थानीय मरीज के परिजनों के द्वारा झड़प होते रहता है. जिसके कारण महिला चिकित्सक और कर्मचारी असुरक्षित महसूस करते हैं.

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Author: AMLESH PRASAD

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