डीएम के जनता दरबार में आयीं 242 शिकायतें, शीघ्र निबटारे का निर्देश

हाजीपुर समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में जिला पदाधिकारी ने जनता दरबार का आयोजन किया गया कार्यक्रम में आमजन की समस्याओं का गंभीरतापूर्वक सुना गया.

हाजीपुर. सोमवार को सात निश्चय-3 के अंतर्गत सबका सम्मान-जीवन आसान कार्यक्रम के तहत जिला, अनुमंडल, प्रखंड, थाना एवं पंचायत स्तर पर भी नियमित रूप से जनता दरबार आयोजित किया गया. विभिन्न स्तरों पर कुल 242 आवेदनों का अवलोकन एवं निस्तारण किया गया. हाजीपुर समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में जिला पदाधिकारी ने जनता दरबार का आयोजन किया गया कार्यक्रम में आमजन की समस्याओं का गंभीरतापूर्वक सुना गया. डीएम के जनता दरबार में कुल 68 परिवाद प्राप्त हुए, जिनमें जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं पंचायतों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएं सीधे डीएम के समक्ष प्रस्तुत कीं. जनता दरबार में प्राप्त परिवाद राजस्व एवं भूमि सुधार, शिक्षा, पुलिस, अवर निबंधन, आवास, विद्युत, डीएसओ, आइसीडीएस, आर्म्स, स्वास्थ्य, जीविका, आपदा प्रबंधन, निर्वाचन एवं सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य विभागों से संबंधित रहे. डीएम ने संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्राप्त परिवादों पर सात दिनों के अंदर कार्रवाई करते हुए प्रतिवेदन जन शिकायत कोषांग को उपलब्ध कराना है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शिकायतों के निष्पादन में किसी प्रकार की लापरवाही अथवा विलंब स्वीकार्य नहीं होगा. इसी क्रम में एक दिव्यांग व्यक्ति गंगा विशुन शर्मा ने अपनी भूमि संबंधी शिकायत लेकर उपस्थित हुए थे. सुनवाई के दौरान उनसे वृद्धा पेंशन के संबंध में जानकारी लिया गया तथा तत्पश्चात सामाजिक सुरक्षा कोषांग को निर्देशित कर मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना हेतु उनका ऑनलाइन पंजीकरण कराया गया. साथ ही जीनत प्रवीण को नया राशन कार्ड निर्गत किया गया. जनता दरबार में एक पीड़ित महिला को न्याय दिलाया गया : प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदिका का आवेदन जनता दरबार से वन स्टॉप सेंटर अग्रसारित किया गया. वन स्टॉप सेंटर ने आवेदिका से परामर्श के क्रम में यह तथ्य सामने आया कि लगभग 12 वर्ष पूर्व उनकी शादी हाजीपुर के गदाई सराय में हुआ था. वैवाहिक जीवन के दौरान उन्हें दो पुत्री एवं एक पुत्र की प्राप्ति हुई. एक फरवरी को एक सड़क दुर्घटना में उनके पति की असामयिक मृत्यु हो गई, जिसके उपरांत पारिवारिक विवाद उत्पन्न हो गया. आवेदिका के अनुसार ससुराल पक्ष ने उन्हें घर से निकाल दिया गया तथा उनके तीनों बच्चों को अपने पास रख लिया गया. कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए आवेदिका ने जिला पदाधिकारी के जनता दरबार में अपने बच्चों को पुनः प्राप्त करने के लिए गुहार लगाई. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी ने त्वरित हस्तक्षेप करते हुए वन स्टॉप सेंटर कार्रवाई करते हुए पारिवारिक एवं सामाजिक स्तर पर समन्वय स्थापित कर दोनों पक्षों के बीच परामर्श एवं वार्ता करायी गयी. प्रशासनिक पहल एवं समुचित काउंसलिंग के फलस्वरूप ससुराल पक्ष ने आवेदिका के तीनों बच्चों को उनके सुपुर्द कर दिया गया. कार्यक्रम में सहायक समाहर्ता,अपर समाहर्ता, विशेष कार्य पदाधिकारी, निदेशक डीआरडीए, जिला विकास पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी (हाजीपुर), भूमि सुधार उप समाहर्ता हाजीपुर, वरीय उप समाहर्ता सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे.

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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