Gopalganj Sugar price Hike : गोपालगंज में चीनी की कीमतों में अचानक तेजी ने त्योहारों से पहले आम लोगों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. फुटकर बाजार में पिछले 30 दिनों में चीनी का भाव 25 रुपये बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है. कीमत बढ़ने का सीधा असर मिठाई, चाय, बेकरी और टॉफी-बिस्किट कारोबार पर पड़ रहा है. रक्षाबंधन से पहले मिठाई की कीमतों में भी 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है.
30 दिनों में 25 रुपये महंगी हुई चीनी
गोपालगंज के फुटकर बाजार में एक महीने पहले चीनी करीब 45 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी. अब इसका भाव बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है. यानी महज 30 दिनों में कीमत में 25 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है. अचानक बढ़े इस भाव ने घरेलू बजट के साथ कारोबारियों की लागत भी बढ़ा दी है.
रक्षाबंधन पर महंगी हो सकती है मिठाई
चीनी के दाम बढ़ने का सबसे सीधा असर मिठाई कारोबार पर दिखाई दे रहा है. शहर के कई मिठाई विक्रेताओं ने लागत बढ़ने के बाद कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक इजाफा किया है. जो मिठाई पहले 500 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी, उसकी कीमत अब 550 से 575 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गयी है.
त्योहार पर करोड़ों का कारोबार, बढ़ी कारोबारियों की चिंता
मिठाई कारोबारियों के अनुसार, रक्षाबंधन के दौरान गोपालगंज में करीब 12 हजार क्विंटल मिठाई की खपत होने का अनुमान है. कारोबारियों के मुताबिक, एक त्योहार के दौरान करीब 40 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. ऐसे में कच्चे माल की लागत बढ़ने से पूरे कारोबार पर इसका असर पड़ने की आशंका है.
बढ़ी लागत तो मिठाई के दाम बढ़ाना मजबूरी
थाना रोड के मिठाई विक्रेता भोला जी ने बताया कि चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई बनाने की लागत बढ़ गयी है. ऐसे में मिठाई के दाम बढ़ाना मजबूरी हो गया है. त्योहार के समय मांग बनी रहने के बावजूद बढ़ी लागत कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है.
चाय के कप पर भी पड़ सकता है महंगाई का असर
चीनी की बढ़ती कीमतों से चाय कारोबारियों की चिंता भी बढ़ गयी है. मौनिया चौक, डाकघर चौक, बंजारी रोड, स्टेशन रोड, जादोपुर रोड और हजियापुर रोड समेत शहर के कई इलाकों में चाय की खपत अधिक होती है. कारोबारियों का कहना है कि चीनी के दाम जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो चाय की कीमत बढ़ानी पड़ सकती है.
ग्राहकों के छिटकने का डर
बंजारी रोड के चाय विक्रेता सुभाष प्रसाद टप्पू ने बताया कि चाय की कीमत बढ़ाने पर ग्राहक कम हो सकते हैं. इसी वजह से वे तत्काल कीमत बढ़ाने से बच रहे हैं. उन्होंने बताया कि लागत बढ़ने के कारण चाय में इस्तेमाल होने वाली चीनी की मात्रा में कुछ कमी करनी पड़ी है.
11 वर्षों में दोगुने से ज्यादा बढ़े चीनी के दाम
कारोबारियों के मुताबिक, वर्ष 2015 में चीनी की कीमत करीब 34 रुपये से बढ़कर 38 रुपये प्रति किलोग्राम हुई थी. उस समय करीब चार रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई थी. कारोबारियों का कहना है कि इसके मुकाबले पिछले 11 वर्षों में चीनी की कीमत दोगुने से भी अधिक बढ़ चुकी है.
थोक मंडियों में आवक घटने से बढ़ी कीमत
बड़ी बाजार के थोक विक्रेता कृष्णा जी प्रसाद के अनुसार, थोक मंडियों में चीनी की आपूर्ति और आवक घटने से कीमतों में तेजी आयी है. मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने से बाजार में भाव ऊपर जा रहा है.
नई फसल और पेराई सत्र से मिलेगी राहत
स्थानीय कारोबारी केदार प्रसाद के अनुसार, गन्ने की नई फसल आने और चीनी मिलों में नए पेराई सत्र की शुरुआत के बाद आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है. कारोबारियों का कहना है कि नई खेप की पर्याप्त आवक नवंबर से पहले संभव नहीं दिख रही है. ऐसे में फिलहाल चीनी की कीमतों में तत्काल राहत की संभावना कम बतायी जा रही है.
