Gopalganj Open Sale of meat : गोपालगंज के कटेया बाजार में सावन माह के दौरान सड़क किनारे खुले में मुर्गा और बकरा काटे जाने को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है. लोगों का आरोप है कि सुबह के समय मस्जिद के समीप सड़क किनारे मांस की दुकानें लगती हैं और कटे हुए पशु को सड़क की ओर लटका दिया जाता है. इससे मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं, दुकानदारों और स्कूली बच्चों को परेशानी हो रही है.
मस्जिद के समीप सुबह सज जाती हैं मांस की दुकानें
स्थानीय लोगों के अनुसार कटेया बाजार स्थित मस्जिद के समीप सुबह होते ही सड़क किनारे मांस की दुकानें लग जाती हैं. दुकानों पर मुर्गे और बकरे काटकर सड़क की ओर लटका दिए जाते हैं. खुले में मांस काटे जाने से आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है.
मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी
कटेया नगर पंचायत क्षेत्र में शिवाला के समीप बाबा जलेश्वर नाथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इस स्थिति से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सुबह के समय मंदिर जाने वाले लोगों को सड़क किनारे लटके कटे हुए मुर्गे-बकरे और आसपास फैली गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है.
गोपालगंज की खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें
स्कूल जाने वाले बच्चों पर भी असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे खुले में पशु-पक्षियों को काटे जाने का असर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों पर भी पड़ रहा है. बच्चे सड़क किनारे कटे हुए पशु-पक्षियों को देखकर डर जाते हैं. लोगों ने इस स्थिति को बच्चों के लिए भी परेशानी का कारण बताया है.
नाले में बहाया जा रहा मांस का कचरा
लोगों का आरोप है कि मांस की दुकानों से निकलने वाला कचरा सड़क किनारे स्थित नाले में बहा दिया जाता है. इससे नाले से दुर्गंध आने लगी है और आसपास गंदगी का माहौल बना हुआ है. स्थानीय लोगों ने इससे संक्रमण और गंदगी फैलने की आशंका जतायी है.
अधिकारियों की आवाजाही के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस मार्ग पर सड़क किनारे मांस की दुकानें लगती हैं, उसी रास्ते से प्रखंड, अंचल और नगर पंचायत कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी आते-जाते हैं. इसके बावजूद खुले में मांस काटने और कचरा फेंके जाने के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है.
निर्धारित स्थान पर दुकान लगाने की मांग
बाजार के व्यवसायियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद परिसर में पर्याप्त जगह उपलब्ध है. लोगों की मांग है कि सड़क किनारे दुकानें लगाने के बजाय मांस की दुकानों के लिए निर्धारित स्थान तय किया जाए. इससे राहगीरों, मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों को परेशानी से बचाया जा सकेगा.
सफाई और दुकानों के लिए जगह तय करने की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क किनारे लगने वाली मांस की दुकानों को हटाने, इलाके में साफ-सफाई कराने और दुकानों के संचालन के लिए निर्धारित स्थान तय करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि खुले में मांस काटने और कचरा फेंकने की स्थिति पर जल्द कार्रवाई जरूरी है.
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय लोगों ने कहा है कि यदि प्रशासन की ओर से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बाजारवासी आंदोलन करने को मजबूर होंगे. लोगों ने प्रशासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर सड़क किनारे खुले में मांस काटने और कचरा फेंकने की समस्या का समाधान कराने की मांग की है.
बिहार सरकार का आदेश
गौरतलब हो कि, बिहार में खुले में मीट, मुर्गा और मछली काटने व बेचने पर प्रतिबंध का सरकारी आदेश अभी भी पूरी तरह लागू है. बिहार नगर पालिका अधिनियम, 2007 की धारा 345 के तहत राज्य के सभी नगर निकायों को सड़कों या फुटपाथों पर खुले आम मांस की बिक्री और कटाई रोकने के सख्त निर्देश हैं. इस कानून के तहत दुकानदारों के लिए वैध लाइसेंस लेना, दुकान के आगे काला शीशा या पर्दा लगाना ताकि मांस बाहर से न दिखे, और कचरे का सही निपटान करना अनिवार्य है. नियमों का उल्लंघन करने पर दुकान सील करने और पांच हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है. ऐसे में सड़क किनारे मांस बिक्री को लेकर लोगों में आक्रोश का माहौल है.
Also Read : गोपालगंज में विदेश भेजने के नाम पर 1.30 लाख की ठगी, दिल्ली पहुंचने के बाद हुआ खुलासा, फिर...
