लीड. वोटिंग के समय पोलिंग एजेंट ने की चूक, तो जाना पड़ सकता है जेल

लोकसभा चुनाव में अब महज पांच दिनों का फासला है. राजनीतिक दलों के द्वारा प्रचार के साथ बूथ मैनेजमेंट शुरू कर दिया गया है. पोलिंग एजेंट ने अगर चूक की, तो उनको जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.

गोपालगंज. लोकसभा चुनाव में अब महज पांच दिनों का फासला है. राजनीतिक दलों के द्वारा प्रचार के साथ बूथ मैनेजमेंट शुरू कर दिया गया है. पोलिंग एजेंट ने अगर चूक की, तो उनको जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. ऐसे में निर्वाचन आयोग ने मतदान एजेंटों के लिए गाइडलाइन तय कर दी है. सभी एजेंटों को मतदान शुरू होने से 1:30 घंटा पहले बूथ पर पहुंचना होगा, ताकि वे मॉक पोल में भाग ले सकें. एजेंट मतदान शुरू होने के पहले होनेवाले मॉक पोल में भाग लेकर यह देखेंगे कि इवीएम ठीक से काम कर रही है या नहीं. जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ शशि प्रकाश राय के अनुसार, किसी मतदान एजेंट की नियुक्ति उम्मीदवार द्वारा स्वयं की जाती है. मतदान एजेंट को मतदान केंद्रों के 100 मीटर की परिधि तथा बूथ के अंदर सेल्यूलर फोन, कॉडलेस फोन या वायरलेस सेट आदि के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी. बूथों पर सिर्फ ऑब्जर्वर, माइक्रो ऑब्जर्वर, पीठासीन पदाधिकारी, सेक्टर ऑफिसर और सुरक्षाकर्मी ही अपने मोबाइल फोन साइलेंट मोड में ले जा सकेंगे. मतदान केंद्र के भीतर अथवा उससे 100 मीटर के दायरे में मतदान एजेंट कोई ऐसा बैज नहीं लगायेगा, जिसपर किसी दल के नेता के फोटो हो अथवा किसी दल का झंडा अथवा चुनाव चिह्न हो. एजेंट एक छोटा बैज लगा सकता है, जिसपर उम्मीदवार का नाम प्रदर्शित होगा. किसी व्यक्ति को मतदान एजेंट के रूप में नियुक्त करने के लिए कोई अर्हता निर्धारित नहीं की गयी है. लेकिन यह उम्मीदवारों के हित में है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को इस कार्य के लिए नियुक्त करे, जो वयस्क एवं परिपक्व हो. एजेंट के पास इपीआइसी या इआरओ, बीएलओ द्वारा जारी फोटो मतदाता पर्ची अथवा आयोग द्वारा तय कोई वैकल्पिक पहचान पत्र अनिवार्य रूप से होना चाहिए. कोई सरकारी सेवक एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकता. यदि वह ऐसा करता है, तो उसे एक साल का कारावास, जिसे तीन माह तक बढ़ाया जा सकता है अथवा जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. ऐसा कोई व्यक्ति, जिसे राज्य सरकार सुरक्षा कवर प्रदान करती है, वह भी एजेंट नहीं बन सकता.

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By Prabhat Khabar News Desk

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