Chowkidar Dismissed: विजयीपुर थाना में पदस्थ चौकीदार गया यादव पर लगे गंभीर आरोपों की जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद जिला पदाधिकारी समीर सौरभ ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच प्रतिवेदन, उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य और आरोपों के प्रमाणित होने के आधार पर डीएम ने गया यादव को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है.
चौकीदार पर बेटे की शादी में दहेज मांगने के अलावा नियुक्ति के समय कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया गया था.
जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद कार्रवाई
डीएम के आदेश के अनुसार विजयीपुर थाना में पदस्थ चौकीदार गया यादव, निवासी सुमेरपुर गांव, पर लगे आरोपों की विभागीय जांच करायी गयी. जांच के दौरान संचालन पदाधिकारी की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट और उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य के आधार पर आरोपों की समीक्षा की गयी.
जांच में आरोप प्रमाणित पाये जाने के बाद बिहार सरकारी सेवक से संबंधित प्रावधानों के तहत गया यादव के खिलाफ कार्रवाई की गयी और उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.
ग्रामीण ने डीएम से की थी शिकायत
मामले की शुरुआत आवेदक अभिनव कुमार यादव की ओर से डीएम के समक्ष दिये गये आवेदन से हुई थी. आवेदन में चौकीदार गया यादव पर गंभीर आरोप लगाये गये थे.
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गया यादव ने अपने पुत्र की शादी में दहेज की मांग की और बाद में शादी से इनकार कर दिया. इसके साथ ही चौकीदार पद पर नियुक्ति के समय कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर धोखाधड़ी एवं फर्जीवाड़े के माध्यम से सरकारी सेवा हासिल करने का आरोप भी लगाया गया था.
आवेदन मिलने के बाद आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से मामले की विस्तृत जांच करायी गयी.
स्पष्टीकरण भी नहीं पाया गया संतोषजनक
जांच की प्रक्रिया के दौरान गया यादव से स्पष्टीकरण मांगा गया था. हालांकि, जांच में उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया.
उपस्थापन पदाधिकारी एवं संचालन पदाधिकारी-सह-हथुआ एसडीओ अभिषेक कुमार चंदन के मंतव्य और जांच प्रतिवेदन के आधार पर आरोपों को प्रमाणित माना गया. इसके बाद डीएम ने उपलब्ध अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कठोर कार्रवाई का आदेश दिया.
पूर्व में भी विभागीय स्तर पर हुई थी कार्रवाई
आदेश में उल्लेख है कि पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी द्वारा भी आरोपी के विरुद्ध लगाये गये आरोपों को लेकर पूर्व में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गयी थी. इसके बाद वेतन निर्धारण से संबंधित कार्रवाई भी की गयी थी.
जिला प्रशासन की ओर से जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद अब सरकारी सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की गयी है.
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