Gopalganj News : मां सिंहासनी को चढ़ाया महाभोग का प्रसाद, महानिशा पूजा आज

Gopalganj News : चैत्र नवरात्र की सप्तमी के मौके पर शुक्रवार को थावे मंदिर में मां सिंहासनी के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था. सुबह के तीन बजे से ही दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार दोपहर के दो बजे तक रही.

थावे. चैत्र नवरात्र की सप्तमी के मौके पर शुक्रवार को थावे मंदिर में मां सिंहासनी के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था. सुबह के तीन बजे से ही दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार दोपहर के दो बजे तक रही.

श्रद्धालुओं ने लगाये मां के जयकारे

कड़ी सुरक्षा के बीच श्रद्धालुओं ने माता के जयकारा लगाते हुए मां सिंहासनी के दर्शन किये. पूरा दिन मंदिर परिसर माता की जयकारा से गूंजता रहा. श्रद्धालुओं ने मां सिंहासनी की पूजा-अर्चना करने के बाद भगवान रहषु की पूजा-अर्चना की. इस बार यूपी-बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली के अलावा कई राज्यों से श्रद्धालु थावे मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं. नारियल, चुनरी, फूल की माला के साथ श्रद्धालुओं ने मां सिंहासनी के दर्शन के लिए पहुंचे थे. सुबह सीजेएम मानवेंद्र मिश्र पाठ सुनाते दिखे, तो शाम 7:30 बजते ही मंदिर के पट को बंद कर दिया गया. संध्या आरती के साथ महाभोग का प्रसाद परंपरागत तरीके से डीएम प्रशांत कुमार सीएच, एसपी अवधेश दीक्षित, एसडीओ डॉ प्रदीप कुमार मां के दरबार में महाभोग का प्रसाद चढ़वाया. मंदिर के मुख्य पुजारी पं संजय पांडेय, पं मुकेश पांडेय, प्रशासनिक पुजारी पं हरेंद्र पांडेय समेत प्रमुख पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ भोग चढ़वाया. उसके बाद थावे मंदिर समिति की ओर से महाभोग प्रसाद काे भक्तों के बीच वितरण कराया जाता है. इस मौके पर डॉ शशि शेखर सिन्हा, ओम प्रकाश सिंह भूट्टो, दारोगा राय, मंदिर के प्रबंधक अमरेंद्र दुबे की प्रमुख भूमिका रही.

भक्तों की सुविधाओं पर रखा गया विशेष ख्याल

धार्मिक न्यास समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किये गये हैं. एसडीओ डॉ प्रदीप कुमार ने मंदिर पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली. मंदिर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है. मंदिर परिसर में ही नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गयी है. श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए जिला प्रशासन के कई आला अधिकारी शुक्रवार को पूरा दिन मंदिर परिसर की विधि-व्यवस्था में लगे रहे.

पर्यटकों ने की थावे जंगल की सैर

ऐतिहासिक थावे मंदिर में मां सिंहासनी के दर्शन के लिए पहुंचे पर्यटकों के लिए थावे का जंगल आकर्षण का केंद्र बना है. आदि शक्ति मां सिंहासनी के दर्शन करने के बाद पर्यटक थावे की जंगल से लेकर राजा के किले का भ्रमण कर रहे हैं. मंदिर परिसर में फोटो दुकानदारों के लिए भी चांदी है. पर्यटक थावे मंदिर में दर्शन करने के साथ ही सामान की खरीदारी भी खूब कर रहे हैं.

बीएमपी ने संभाली सुरक्षा की कमान

थावे मंदिर में श्रद्धालुओं की जुटी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये हैं. मंदिर परिसर से लेकर सड़क तक बीएमपी तैनात किये गये हैं. जिला प्रशासन के मुताबिक बीएमपी, बिहार पुलिस, होमगार्ड जवान के अलावा स्काउट-गाइड के छात्र-छात्राओं को तैनात किया गया है. जो भीड़ पर खास नजर रख रहे थे.

महानिशा पूजा की तैयारी जोरों पर

मंदिर के मुख्य पुजारी पं संजय पांडेय ने बताया कि शनिवार की शाम को हथुआ राज की ओर से पूजा की जायेगी. आधी रात को महानिशा पूजा और रविवार को पूर्णाहुति करायी जायेगी. जिसकी तैयारी चल रही है. थावे में महानिशा पूजा से मां के दर्शन शुरू होंगे जो रामनवमी के दिन तक जारी रहेगा. उसके दो दिनों बाद तक थावे महोत्सव होने के कारण मंगलवार तक थावे में भीड़ रहेगी.

आज मां को चढ़ाएं कमल का पुष्प व नारियल

आचार्य पं अमित तिवारी ने बताया कि नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी को भोग में नारियल और चीनी की मिठाई बनाकर चढ़ाने से माता प्रसन्न होती हैं. मां को कमल का पुष्प पसंद है. हर तरह की मनोकामना पूर्ण करती हैं. घर धन-संपदा से भर देती हैं. माता को सफेद रंग काफी पसंद है. भोग लगाने के बाद नारियल को ब्राह्मण को दे दें और प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांट दें.

दुर्गाष्टमी को कन्या पूजन करने से दूर होगी दारिद्रता

ज्योतिषाचार्य पं ओम तिवारी ने बताया कि दुर्गाष्टमी को महागौरी की पूजा के साथ कन्या पूजन करते हैं, वह हलवा-पुड़ी, सब्जी और काले चने का प्रसाद माता को लगाते हैं और फिर कन्या पूजन करते हैं. कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं लेकिन अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ रहता है. कन्याओं की संख्या नौ हो, तो अति उत्तम, नहीं तो दो कन्याओं के साथ भी पूजा की जा सकती है. भक्तों को माता की पूजा करते समय गुलाबी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए. क्योंकि गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इससे परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बना रहता है और यह रंग परिवार को प्रेम के धागों में गूंथ कर रखा जाता है.

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Author: GURUDUTT NATH

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