मांझा. मिडिल इस्ट में जारी तनाव का असर रसोई गैस आपूर्ति व्यवस्था पर अब भी बरकरार है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गैस रिफिल की उपलब्धता को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है. शहरों में जहां उपभोक्ता 25 दिन बाद ही गैस सिलिंडर की बुकिंग कर पा रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि बढ़ाकर 45 दिन कर दी गयी है. इससे गांवों के उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि 45 दिन बाद बुकिंग करने के बावजूद गैस सिलिंडर की डिलीवरी समय पर नहीं हो रही है. कई बार बुकिंग के बाद आठ से 10 दिन तक इंतजार करना पड़ता है. इस दौरान लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी और चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है. भीषण गर्मी में चूल्हे पर खाना बनाना महिलाओं और बुजुर्गों के लिए काफी कठिन साबित हो रहा है. इससे घरेलू खर्च भी बढ़ गया है. उपभोक्ता शैली देवी, आशा देवी और पूनम देवी ने बताया कि उनके घर में एक सिलिंडर मुश्किल से 25 दिन चलता है. ऐसे में 45 दिन बाद बुकिंग की व्यवस्था से घर चलाना मुश्किल हो गया है. लोगों ने आरोप लगाया कि बुकिंग के बाद एजेंसी का बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है, लेकिन समय पर सिलिंडर नहीं मिल रहा है.
एजेंसी ने परिवहन दूरी को बताया वजह
ग्रामीण अशोक प्रसाद, संजय साह, अनिकेत प्रसाद और सुमित सहित अन्य उपभोक्ताओं ने कहा कि शहरों की तुलना में गांवों में आपूर्ति व्यवस्था काफी धीमी है. इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. वहीं गैस एजेंसी के कर्मचारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिलीवरी नेटवर्क कमजोर होने और परिवहन दूरी अधिक होने के कारण आपूर्ति में देरी हो रही है. हालांकि उन्होंने जल्द व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया है. उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी इलाकों की तरह 25 दिन बाद गैस रिफिल बुकिंग की सुविधा दी जाये.
