Gopalganj News : महेंद्र महिला कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल पर खर्च हुए थे 40 लाख, बिना उपयोग के ही 10 सालों में हो गया जर्जर

Gopalganj News : शहर के महेंद्र महिला कॉलेज में 40 लाख रुपये खर्च कर गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण हुआ. 10 वर्ष पहले काम शुरू हुआ. लगभग 2016 में ग्राउंड फ्लोर का काम पूरा भी हो गया. लेकिन आज तक इसका लाभ छात्राओं को नहीं मिला.

गोपालगंज. शहर के महेंद्र महिला कॉलेज में 40 लाख रुपये खर्च कर गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण हुआ. 10 वर्ष पहले काम शुरू हुआ. लगभग 2016 में ग्राउंड फ्लोर का काम पूरा भी हो गया. लेकिन आज तक इसका लाभ छात्राओं को नहीं मिला. अब मेंटेनेंस और उपयोग के अभाव में यह गर्ल्स हॉस्टल जर्जर स्थिति में पहुंच गया है.

दूरी के कारण कई छात्राएं नहीं आ पातीं रेगुलर क्लास करने

हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर में पांच बड़े-बड़े कमरों के अलावा किचेन, स्नानघर, शौचालय आदि बनाये गये हैं, लेकिन सब बेकार पड़े हैं. जिला मुख्यालय में कॉलेज के होने के कारण यहां सुदूर ग्रामीण इलाके की छात्राएं पढ़ने आती हैं. दूरी के कारण ये छात्राएं रेगुलर क्लास नहीं आतीं. कई बार परीक्षा के समय छात्राओं को शाम तक रुकना पड़ता है, तो घर जाने में परेशानी होती है. ऐसे में उनके लिए हॉस्टल की नितांत आवश्यकता है. हॉस्टल है भी, लेकिन इसका लाभ छात्राओं को नहीं मिल पाता.

फर्स्ट फेज के काम में हुआ था विलंब

यूजीसी ने इस हॉस्टल के निर्माण के लिए 80 लाख रुपये का फंड दिया था. फर्स्ट पेज में 40 लाख रुपये खर्च होने थे. तत्कालीन प्राचार्य प्रो डॉ मधु प्रभा की देखरेख में काम की शुरुआत हुई. इसके बाद 2014 में प्रो. डॉ कुमारी ने प्राचार्य का पदभार लिया. उनके कार्यकाल में भी फर्स्ट फेज का काम हुआ. फर्स्ट फेज के काम में काफी लेट हुआ, जिसके कारण यूजीसी ने बचे 40 लाख रुपये वापस ले लिये और काम अधूरा रह गया. हालांकि फर्स्ट पेज में ग्राउंड फ्लोर का पूरा काम निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया था. लेकिन इसका उपयोग आज तक नहीं हुआ.

अतिक्रमण की शिकार है कॉलेज की जमीन

महेंद्र महिला कॉलेज में हॉस्टल तो जर्जर हो ही चुका है. कॉलेज की जमीन भी अतिक्रमण की शिकार है. कॉलेज के मेन गेट के 100 मीटर पहले से ही कॉलेज की जमीन शुरू हो जाती है. इसी बीच कॉलेज की खाली जमीन पर लोगों ने सीढ़ी आदि का अवैध निर्माण कर अतिक्रमण किया है. वहीं जो जमीन खाली है, वहां अवैध पार्किंग के रूप में इस्तेमाल होता है. यदि यहहां जमीन की बाउंड्री हो जाये, तो छात्राओं के लिए एक बेहतर कैंपस तैयार होगा.

क्या कहती हैं प्राचार्य

वर्तमान में यूजीसी की ओर से कोई फंड नहीं मिल रहा. ऐसे में स्थानीय सांसद, एमएलसी या विधायक जैसे जनप्रतिनिधि अपने स्तर से कोई फंड मिले, तो हॉस्टल का अधूरा काम पूरा हो सकता है, जो कि छात्राओं के लिए बड़ी राहत होगी. जनप्रतिनिधियों को भी इस बात से अवगत कराया जायेगा.

प्रो. डॉ रुखसाना खातून, प्राचार्य, महेंद्र महिला कॉलेज.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: GURUDUTT NATH

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >