Khet Mazdoor Sabha: अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के राज्यव्यापी आह्वान पर भोरे अंचल कार्यालय परिसर में 13 और 14 अगस्त को दो दिवसीय सामूहिक भूख-हड़ताल शुरू हुई. गरीबों, भूमिहीनों और खेत मजदूरों के अधिकारों व विभिन्न मांगों को लेकर आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए.
गरीबों और भूमिहीनों के अधिकारों को लेकर उठायी आवाज
भूख-हड़ताल का नेतृत्व जिलाध्यक्ष सुबास पटेल, विश्वनाथ गुप्ता, लाल बचन राम, अवध लाल राम और हलीम मियां सहित अन्य नेताओं ने किया. धरनास्थल पर वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं. नेताओं ने मनरेगा की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण मजदूरों को पलायन करना पड़ रहा है.
महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी प्रदर्शन
वक्ताओं ने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार से गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ रही है. इसके अलावा दलित और शोषित वर्ग पर दबंगों के अत्याचार का आरोप लगाते हुए सरकार से प्रभावी कार्रवाई की मांग की गयी.
पांच डिसमिल जमीन और पांच लाख रुपये आवास राशि की मांग
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में सभी भूमिहीन गरीबों को पांच डिसमिल जमीन और बासगीत पर्चा देने की मांग शामिल है. इसके साथ ही इंदिरा आवास योजना की राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग उठायी गयी. अकुशल मजदूरों के लिए 700 रुपये दैनिक न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की भी मांग की गयी.
पेंशन और राशन से जुड़ी मांगें भी शामिल
नेताओं ने सभी वृद्धों, दिव्यांगों और विधवाओं को तीन हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की. साथ ही राशन कार्ड की सूची से गरीबों के नाम काटने के आदेश को वापस लेने की मांग की गयी.
ग्रामीण टैक्स और खाद की कालाबाजारी रोकने की मांग
आंदोलनकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में टैक्स वसूली पर रोक लगाने, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने, नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने तथा यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने की मांग की. वक्ताओं ने कहा कि गरीबों और खेत मजदूरों की समस्याओं का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
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