मिसाल : इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर ने डोनेट किया ब्लड
गोपालगंज : सदर अस्पताल के आइसीयू में भरती लावारिस मरीज की हालत गंभीर देख ड्यूटी में तैनात डाॅ अमर कुमार ने उसे नया जीवन देने के लिए अपना ब्लड डोनेट किया. डॉक्टर ने ब्लड देने के साथ ही खाने-पीने का भी इंतजाम कराया. दरअसल सदर अस्पताल के बाहर सड़क किनारे बुधवार को 30 वर्षीय युवक लावारिस हालत में पड़ा था. जिला ब्लड डोनेट टीम के सदस्यों ने लावारिस मरीज को इमरजेंसी वार्ड में भरती कराया. उस वक्त ड्यूटी पर डॉ अमर कुमार थे. डॉक्टर ने मरीज की हालत नाजुक देख तत्काल उसे आइसीयू में भरती कराया. गुरुवार को जांच के बाद ब्लड की जरूरत पड़ी. उस वक्त ब्लड देने के लिए कोई नहीं था, तो डॉक्टर ने ब्लड बैंक में अपना खून देकर उसकी जान बचाने की पहल की.
चंदू के मां-बाप की हो चुकी है मौत
मरीज की पहचान दूसरे दिन हुई. महम्मदपुर थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव के निवासी चंदू कुमार ने बताया कि उसके माता-पिता की बचपन में ही मौत हो चुकी है. बाहर रह कर कमाता था. घर पहुंचने पर बीमार हो गया. बड़े भाई ने उसे निकाल दिया. उसने महम्मदपुर में कुछ महीनों तक होटल में काम किया. स्थिति लगातार बिगड़ती देख होटल मालिक ने उसे इलाज कराने के बजाय निकाल दिया.
मुरझाये पौधे को हरा करने का हुनर जानता है चंदू
चंदू ने बताया कि वह छत्तीसगढ़ में नर्सरी लगाने का काम करता था. वह हरे-भरे घास की चादर लगाने से लेकर नर्सरी और बाग-बगीचे को हरा-भरा करने का हुनर जानता है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उसने बताया कि मुरझाये पौधों को भी हरा-भरा कर सकता है. स्वास्थ्य प्रबंधक ने उसके स्वस्थ होने तक आइसीयू में रहने की बात कही.
मरीज को नया जीवन देना ही कर्तव्य : सीएस- फोटो न. 13 डाॅ मधेश्वर प्रसाद शर्मा
सिविल सर्जन डाॅ मधेश्वर प्रसाद शर्मा ने लावारिस मरीज को ब्लड डोनेट किये जाने पर डॉक्टर अमर कुमार की पहल को बेहतर बताया. सीएस ने कहा कि जीवन बचाना ही डॉक्टर का असली कर्तव्य है. मरीज चाहे लावारिस हो, गरीब हो या अमीर, सबके साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए.
