जनसंख्या नियंत्रण में पुरुषों ने महिलाओं से निकले आगे
केसठ : जनसंख्या नियंत्रण के सबसे अहम उपायों में से एक है महिला बंध्याकरण और दूसरा पुरुष नसबंदी. शिशु जन्म की पूरी प्रक्रिया में महिला की भागीदारी ज्यादा होती है और उनकी समस्याएं भी अधिक होती हैं, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण से निजात के लिए पुरुषों ने नशबंदी के प्रति ज्यादा उत्साह दिखाया है. धीरे-धीरे पुरुष अब भी इस गलत और अवैज्ञानिक धारणा से मुक्त हो रहे हैं कि नसबंदी होने पर वे अपनी ताकत खो बैठेंगे या कमजोरी का शिकार होंगे.नतीजा यह है कि विगत सत्र में प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केसठ में कुल ऑपरेशनों में से पुरुषों की संख्या अधिक है, जिसमें पूरे एक वर्ष में 88 पुरुषों ने नशबंदी कराया है. वही 72 महिलाओं ने बंध्याकरण कराया है. इस प्रकार कुल 160 महिलाओं व पुरुषों की सहभागिता रही, जिससे जिले में केसठ का सर्वोच्च स्थान रहा.
पुरुषों व महिलाओं को मिलता है प्रोत्साहन राशि : सरकार ने नसबंदी करानेवाले पुरुष एवं बंध्याकरण करानेवाली महिलाओं को प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया है. अब तो सरकारी अस्पतालों के अलावा एनजीओ के माध्यम से निजी चिकित्सालयों में भी नसबंदी तथा बंध्याकरण होने लगे हैं.सरकार ने पुरुषों के लिए 2000 रुपये तथा महिलाओं के लिए 1400 रुपये प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है.
क्या कहतें चिकित्सा प्रभारी
प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के चिकित्सा प्रभारी ने बताया कि महिलाओं के बंध्याकरण की अपेक्षा पुरुषों की नसबंदी आसान है. जिसको लेकर जागरूकता अभियान से लोगों को प्रेरित किया गया.पुरुषों के मन से भय को हटाया गया .पुरुषों को इसके लिए राजी करने के विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी प्रयास प्रखंड में सफल साबित हुआ है.
