सब कुछ जान रही थी पुलिस, तो क्यों नहीं की गयी कार्रवाई

मांझा : मांझा थाना क्षेत्र के मलिकाना गांव में हुई वारदात के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. सदर अस्पताल में घायलों के इलाज का जायजा लेने पहुंचे नगर इंस्पेक्टर बालेश्वर राय ने पीड़ित परिजनों का फर्द बयान दर्ज कराया. उधर, वारदात के बाद से पीड़ित परिजन दहशत में हैं. परिजनों का आरोप […]

मांझा : मांझा थाना क्षेत्र के मलिकाना गांव में हुई वारदात के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. सदर अस्पताल में घायलों के इलाज का जायजा लेने पहुंचे नगर इंस्पेक्टर बालेश्वर राय ने पीड़ित परिजनों का फर्द बयान दर्ज कराया. उधर, वारदात के बाद से पीड़ित परिजन दहशत में हैं. परिजनों का आरोप है कि पुलिस सबकुछ जान रही थी,

लेकिन कार्रवाई नहीं कर रही थी. पीड़ित परिवार के मुखिया लालबाबू सिंह ने बताया कि आरोपितों के पड़ोसी मोतिचंद यादव मेरे यहां काम करते हैं. पुरानी रंजिश को लेकर इनके साथ मारपीट की जा रही थी. परिवार के सदस्यों ने मोतिचंद यादव की जान बचायी. इसी बात को लेकर गाली-गलौज करते हुए मारपीट की गयी. गुरुवार को इस मामले में मांझा थाने में लिखित शिकायत की गयी. उधर, आरोपितों को थाने में शिकायत करने की जानकारी जैसे ही हुई, शुक्रवार की सुबह घर पर फायरिंग शुरू कर दी गयी.

आरोपित हथियार के साथ 30-40 की संख्या में थे. परिवार के सदस्यों को बचने का भी मौका नहीं दिया गया. घर में घुस कर महिलाओं की भी बेरहमी से पिटाई की गयी, जिसमें आगनबाड़ी सेविका संजू देवी के सिर पर गहरा जख्म होने के कारण हालत चिंताजनक बनी हुई है.

अस्पताल में मची रही अफरा-तफरी : सदर अस्पताल में इलाज कराने के लिए एक साथ सात-आठ लोग जैसे ही पहुंचे, अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया. चार-चार कंपाउंडर घायलों के शरीर से छर्रा निकालने में जुटे रहे. घायलों के शरीर से अधिकतर लोहे का छर्रा ही निकल रहा था. सुधांशु सिंह नामक घायल के शरीर से करीब 20 छर्रे निकाले गये थे. हालांकि डाॅक्टरों ने सूझ-बूझ से काम लेते हुए गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया.
आखिर कहां से पहुंचा था हथियार : मांझा पुलिस जब सक्रिय थी, तो पर्याप्त संख्या में हथियार कहां से पहुंचा. सदर अस्पताल में घायलों का फर्द बयान लेने पहुंची पुलिस ने पीड़ितों को आश्वासन दिया कि पुलिस सक्रिय थी. लेकिन, परिजनों का आरोप था कि पुलिस सक्रिय रहती तो, कार्रवाई की होती. पुलिस को घटना की जब जानकारी दी गयी, तो काफी देर बाद घटनास्थल पर पहुंची. अबतक वह हथियार भी बरामद नहीं हो सका है, जिससे दहशत फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया था.
शुक्र था, लालबाबू के मोबाइल में लगी गोली : भगवान का शुक्र था कि लालबाबू सिंह पर चलायी गयी गोली, उनके मोबाइल पर लगी. पीड़ित परिजनों ने कहा कि एक साथ कई लोगों के हाथ में हथियार था, जिससे लगातार कई राउंड गोलियां चलायी गयीं. बेटों को बचाने के लिए लालबाबू सिंह पहुंचे थे. लेकिन, गोली उनके मोबाइल पर लगी. मोबाइल में फंसी गोली को भी जांच करने पहुंचे पुलिस अधिकारी से पीड़ित लालबाबू ने दिखायी है.
थानेदार को हटाने की मांग पर अड़े परिजन : सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे परिजन मांझा के थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे. पुलिस अधिकारियों के सामने ही थानाध्यक्ष पर लिखित शिकायत देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रहें थे. हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने उनकी बात को वरीय अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया.
दूसरे पक्ष ने लगाया पथराव का आरोप : मलिकाना गांव में हुई घटना में दूसरे पक्ष ने भी पुलिस के पास घायल होने की शिकायत की है. पथराव के दौरान दीपू यादव, अशोक यादव, अनिल यादव, पुनदेव व जगरनाथ यादव के घायल होने की बात बतायी जा रही है. हालांकि सदर अस्पताल में एक ही पक्ष के घायल इलाज कराने के लिए पहुंचे थे.

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