अस्सी घाट की तरह डुमरिया में होगी नारायणी आरती

भूतल परिवहन मंत्रालय को विधायक ने सौंपी डीपीआर गोपालगंज : काशी के अस्सी घाट की तरह बैकुंठपुर के डुमरिया घाट पर भी महाआरती शुरू कराने का प्रस्ताव विधायक मिथिलेश तिवारी ने भूतल एवं परिवहन मंत्रालय को सौंपा है. भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एवं राज्य मंत्री मनसुख भाई मंडबिया ने विभाग को सर्वे कर […]

भूतल परिवहन मंत्रालय को विधायक ने सौंपी डीपीआर

गोपालगंज : काशी के अस्सी घाट की तरह बैकुंठपुर के डुमरिया घाट पर भी महाआरती शुरू कराने का प्रस्ताव विधायक मिथिलेश तिवारी ने भूतल एवं परिवहन मंत्रालय को सौंपा है. भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एवं राज्य मंत्री मनसुख भाई मंडबिया ने विभाग को सर्वे कर रिपोर्ट देने को कहा है. उम्मीद है कि कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर यहां महाआरती की शुरुआत होगी. विधायक ने बताया कि नारायणी नदी का पौराणिक महत्व है. विष्णु पुराण में वर्णित है कि नारायणी के दर्शन मात्र से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं. इसी नारायणी में सोनपुर में हरिहरनाथ के रूप में भगवान विष्णु को जन्म लेना पड़ा था
. डुमरिया घाट इस्ट एंड वेस्ट कॉरीडोर गुजरात के गांधी नगर से असम के सिलचर तक जानेवाले हाइवे पर है. यहां कुशीनगर से केसरिया, वैशाली एवं गया आने-जाने वाले बौद्धिस्ट पर्यटकों के लिए काफी बेहतर संभावना के रूप में महाआरती साबित होगी. इसके लिए गंडक नदी की दोनों बगल यानी गोपालगंज और पूर्वी चंपारण के एक किमी के रेंज में पक्का घाट, रैंप, बिजली लाइट, पर्यटकों को ठहरने के लिए शेड जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना जरूरी है.
महाआरती से पर्यटन के क्षेत्र में एक बेहतर माहौल मिलेगा.
कार्तिक पूर्णिमा पर जुटती है भीड़
कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर डुमरिया घाट पर सारण और चंपारण के अलावा 10 जिलों से लाखों लोग स्नान और दान करने आते हैं. सोनपुर के बाद नारायणी नदी में सर्वाधिक भीड़ होती है. पर्यटन के क्षेत्र में यहां विकसित होने से न सिर्फ इलाके का विकास होगा बल्कि बिहार का भी विकास पर्यटन के क्षेत्र में होगा.
पहले से मंजूर है शवदाह गृह : डुमरिया में पहले से पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विद्युत शवदाह गृह बनाने की मंजूदी दे चुके हैं. यहां अत्याधुनिक तरीके से शव का अंतिम संस्कार के लिए मशीन लगायी जायेगी. यहां एनएचएआइ की तरफ से नारायणी आरती के लिए पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने से शवदाह गृह बनाना आसान होगा.
मई, 2018 तक बन कर तैयार होगा बांध
नारायणी नदी के क्रोध से गाइड बांध मुक्ति दिलायेगा. तीन साल तक के चरणबद्ध आंदोलन के कारण यूपी के अहिरौली दान से विशुनपुर तटबंध तक नया बांध बनाने के काम ने अब रफ्तार पकड़ लिया है.
सासामुसा : सोमवार की सुबह नौ बजे थे. यूपी के अहिरौली दान स्थित एपी बांध से नया गाइड बांध का काम युद्ध स्तर पर चल रहा था. इलाके के सैकड़ों लोग बांध बनाने के लिए जुटे हुए थे. बांध के निर्माण से दियारा का भविष्य टिका हुआ है. लोगों में इस बांध से एक नयी उम्मीद जगी है. भरोसा है कि नदी का कटाव यह बांध रोक लेगा. बांध के निर्माण में 40 ट्रैक्टर 18 घंटे काम कर रहे हैं, जबकि एक सौ ट्रैक्टर 19 तारीख से इस साइड पर मोरचा संभालेंगे. 8.2 किमी लंबा बांध का निर्माण कार्य मई, 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस बांध के निर्माण के लिए सरकार 62.5 करोड़ की राशि आवंटित कर चुकी है.
बांध निर्माण में लगी एजेंसी को इलाके के लोग जरूरत से ज्यादा सहयोग कर रहे हैं. लोगों का सहयोग इसलिये भी है कि नदी की त्रासदी से यह बांध मुक्ति दिलायेगा.
निर्माण कार्य पर है संघर्ष समिति की नजर : गाइड बांध की निर्माण कार्य पर दियारा संघर्ष समिति की नजर है. निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी ध्यान रखा जा रहा है.
समिति के सदस्य लगातार निर्माण कार्य में सहयोग भी कर रहे हैं. संघर्ष समिति के संयोजक अनिल मांझी, राजेश देहाती, शिवजी सिंह कुशवाहा, सत्येंद्र बैठा, राजद नेता अरुण सिंह, पैक्स अध्यक्ष मिथिलेश राय, नंदकुमार नंदू आदि इस बांध के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं.
अभियंताओं की टीम कर रही कैंप : गाइड बांध निर्माण के दौरान सीवान अवर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता की टीम कैंप कर रही है. निर्माण एजेंसी पर लगातार गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए दबाव बनाया जा रहा है. कालामटिहनिया में महज दो जेसीबी के भरोसे गाइड बांध का निर्माण समय पर पूरा कराने का दावा संवेदक और विभाग कर रहा है, जिससे लोगों में असंतोष दिख रहा है.

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