जानलेवा हमले में अफसर इंचार्ज भी हुए घायल
अपने पर ही हुए हमले के आरोपितों को नहीं पकड़ पा रही पुलिस
गोपालगंज : लोगों के आक्रोश का शिकार पुलिस बन रही है. आये दिन पुलिस पर हमले हो रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है. पुलिस सुरक्षा और सहयोग के लिए तत्पर रहती है. लेकिन, यहां पुलिसकर्मियों के विरुद्ध लोगों का आक्रोश भी ऐसे ही नहीं फूट रहा है. पुलिस महकमा को इस मामले में गंभीर चिंतन करने की जरूरत है. आखिर लोगों के आक्रोश का शिकार पुलिस के अधिकारी क्यों हो रहे हैं. जिले में पिछले दो सप्ताह में चार बार पुलिस पर हमला हुआ है.
पहली घटना हथुआ के पावर सब स्टेशन पर 25 मार्च की रात हुई. पावर कर्मियों पर फायरिंग करने की सूचना पर पहुंची पुलिस पर गोलीबारी की गयी थी. इसमें पुलिस का एक जवान मुन्ना चौधरी घायल हो गया था. इस घटना के ठीक एक सप्ताह बाद हथुआ के रूपनचक भोजू टोला गांव में वारंटियों को गिरफ्तार करने गयी पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया. हमले में हथुआ थाने के दारोगा बीके सिंह के अलावा दारोगा लक्ष्मीनारायण महतो, जमादार मुसलिम राइन, जमादार ऋषिमुनि के अलावा दो अन्य पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे.
इसी दिन 25 मार्च को ही बरौली के माधोपुर ओपी पुलिस पर महम्मदपुर बाजार में कुछ लोगों ने हमला कर दिया था. पुलिस यहां वारंटी पिता-पुत्र को गिरफ्तार करने गयी थी. ग्रामीणों के हमले में थाने का सिपाही मुकेश यादव घायल हुआ था. इधर, कटेया के निहुरूआ गांव में व्यवसायी की हत्या के बाद फिर नाराज लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया. घटना में थानाध्यक्ष धनंजय कुमार को मामूली चोट आयी है, लेकिन एएसआइ साबिर अली समेत तीन पुलिस कर्मियों को गंभीर चोट लगी है.
25 मार्च-हथुआ पावर सब स्टेशन पर पुलिस पर फायरिंग, जिसमें सिपाही को गोली लगी थी.
25 मार्च-माधोपुर ओपी पुलिस पर वारंटियों ने हमला किया था, इसमें कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए.
एक अप्रैल-हथुआ पुलिस पर रूपनचक में वारंटियों ने हमला किया था, पांच पुलिसकर्मी घायल.
छह अप्रैल-कटेया पुलिस पर निहरुआ में हत्या के बाद हमला, एएसआइ समेत तीन घायल.
पांच आरोपित अब भी हैं फरार
माधोपुर ओपी पुलिस टीम पर महम्मदपुर बाजार में हमला करने के मामले में पुलिस ने आरोपितों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. लेकिन, पांच अन्य आरोपितों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. हालांकि पुलिस आरोपितों कर कानूनी कार्रवाई कर रही है.
