महम्मदपुर : वर्ष 2016 आधा दर्जन सांईं परिवार के लिए वरदान साबित हुआ है. ऐसा शराबबंदी से हुआ है. खुशहाल जिंदगी बिताते हुए सांईं परिवार की औरतें बताती हैं कि घरे पहुंचते पिटाई करे लागस, लइका भाग के दोसरा के घरे लुका जा सन, इ त नीतीश बाबू के देन बा जे छवे महीना में जमाना बदल गइल. अब त घरे आवेले त आवते 100-50 के नोट थमा देले. बड़ा आछा भइल. उम्मीदे ना रहे कि सुधार होई. शराबबंदी पर चहक कर कहती है
आसमा खातून. मानों शराबबंदी उसके लिए वरदान साबित हुआ है. ऐसी खुशियां सिधवलिया प्रखंड के अमरपुरा पंचायत के वार्ड नंबर 13 के अकेले आसमा खातून के घर में नहीं बल्कि आधा दर्जन परिवारों में है जिनकी शराबबंदी के बाद दशा ही बदल गयी है. कल तक शराब पीकर मारपीट करनेवाले युवक आज रोजगार में लगे हैं. पूछने पर यहां की औरतें बताती हैं कि पांच लोग जो दिन भर शराब पीकर पड़े रहते थे, आज बैंड-बाजा बजा कर खुशी से परिवार की परवरिश कर रहे हैं. आसमां बताती हैं कि उसके पति सर्फुद्दीन घर की चिंता से बेफिक्र शराब पीकर दिन भर खेत में पड़े रहते थे. इसी बीच चार बच्चे हो गये. मैके से पैसे मंगायी वो भी मार-पीट कर ले लिये. शराब बंद हुई, तो आज बैंड बजा रहे हैं. हमारे भी बच्चे अब पढ़ने जा रहे हैं.
कुछ ऐसा ही दर्द है अमीना खातून का. उसके तीन बेटे और तीन ही बेटियां हैं. उसके पति मंजूल राय का एक ही काम था दारू पीना और घर में आकर मारना-पीटना. अब ऐसा कुछ नहीं है. वहीं, छोटन राय की पत्नी नैन तारा बताती है कि बच्चे पैदा करना और शराब पीना मेरे पति का काम था. भविष्य के बारे में समझाओ तो ऊपर से पिटाई. यह तब छूटा जब नीतीश बाबू ने शराब बंद की. कुछ ऐसा ही हाल ऐनुल खातून और कैनुर नेशा का है. शराबबंदी के बाद सर्फुद्दीन, मंजूर, खलील जाकिर और शमसुद्दीन जहां बैंड में काम करते हैं, वहीं राजा हुसैन परदेस चला गया है, लेकिन शराब नहीं पीता. शराब का नशा उतरा, तो अब परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना इनका नशा बन गया है. शराबबंदी से दुखी रहनेवाले ये आधा दर्जन परिवार आज खुशियों से थिरक रहे हैं.
