दूसरे िदन भी शहर बंद

पुलिसिया कार्रवाई से नाराज व्यवसायियों ने दूसरे दिन भी शहर को बंद रखा. इस दौरान दुकानें बंद रहीं. बंद का व्यापक असर देखा गया. बंद के दाैरान स्थानीय पुलिस चौकस रही. गोपालगंज : पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शहर के कारोबारियों ने दूसरे दिन भी अपने कारोबार को बंद रखा. दूसरे दिन बंद […]

पुलिसिया कार्रवाई से नाराज व्यवसायियों ने दूसरे दिन भी शहर को बंद रखा. इस दौरान दुकानें बंद रहीं. बंद का व्यापक असर देखा गया. बंद के दाैरान स्थानीय पुलिस चौकस रही.

गोपालगंज : पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शहर के कारोबारियों ने दूसरे दिन भी अपने कारोबार को बंद रखा. दूसरे दिन बंद का व्यापक असर रहा. इस बंद का सहयोग हर कारोबारी कर रहा है. कारोबारियों ने स्वेच्छा से अपने-अपने प्रतिष्ठानों को बंद कर लिया. बंद को लेकर पुलिस काफी चौकस रही. मौनिया चौक से लेकर आंबेडकर चौक, डाकघर चौक, पुरानी चौक आदि इलाकों में पुलिस बल तैनात था. पुलिस के वरीय अधिकारी पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे थे. उधर, बुधवार को बंजारी रोड, जादोपुर रोड, आंबेडकर चौक, जंगलिया चौक पर कारोबारियों ने अपनी दुकानों को खोल रखा था. लेकिन, गुरुवार को यहां सभी दुकानें बंद रहीं. बंद के कारण लगभग 5.2 करोड़ रुपये का कारोबार कुप्रभावित हुआ है.
अपील का प्रभाव : बुधवार को मेन रोड, मौनिया चौक, पुरानी चौक, चंद्रगोखुल रोड, श्याम सिनेमा रोड में पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ चश्पाये गये परचे को देख कर कारोबारियों ने दुकानों को बंद कर लिया. कई हिस्सों में बंद का असर नहीं था. गुरुवार की सुबह शहर के प्रमुख कारोबारियों ने थाना रोड, बड़ी बाजार, बंजारी रोड आदि में पहुंच कर बंदी में सहयोग करने की अपील की. कारोबारियों की अपील का असर व्यापक हुआ और दुकानें खुलने के साथ ही बंद हो गयीं. पूरी तरह से पहली बार बंद का असर गोपालगंज शहर में देखा गया.
बनायी रणनीति : पुलिस के खिलाफ आंदोलन पर उतरे शहर के व्यवसायियों ने बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनायी. गुरुवार को हुई बैठक में कारोबारियों ने कई बिंदुओं पर चर्चा की. बैठक में अब तक राजनीतिक दलों के द्वारा सहयोग नहीं दिये जाने का मामला भी उठा. कारोबारियों का कहना है कि उपद्रव कांड में जो शामिल हैं.
क्या है पूरा मामला : दुर्गापूजा के बाद 14 अक्तूबर को मूर्ति विसर्जन के दौरान तुरकाहां में दो गुटों के बीच रोड़ेबाजी और झड़प के बाद आगजनी की घटना में आधा दर्जन वाहनों को जला दिया गया था. इस घटना में कई लोग जख्मी हुए थे. ग्रामीण इंस्पेक्टर निगम कुमार वर्मा भी गंभीर रूप से घायल हुए थे. इस मामले में दोनों पक्षों से अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हुई थी. पुलिस ने इस मामले में कांड संख्या 419, 420, 421, 422 दर्ज किया, जिसमें कारोबारियों का कहना है कि बेकसूर राजीव कुमार उर्फ पल्टू को उसी समय गिरफ्तार कर लिया गया था. इसके विरोध में शहर बंद रहा. कुछ कारोबारियों के दबाव में शहर को खोलना पड़ा. पल्टू के जेल से निकलते ही पुन: उसे अन्य कांडों में भी अभियुक्त बना दिया गया. इतना ही नहीं शहर के निर्दोष लोग इंटक के नेता ताहिर हुसैन, पंकज सिंह राणा, मनीष किशोर नारायण, दीपक कुमार दीपू जैसे लोगों को भी आरोपित बनाया गया.
पार्षदों के साथ पुलिस ने की बैठक
शहर बंद को लेकर पुलिस ने पार्षदों के साथ बैठक की. दो दिनों से शहर बंद होने से पुलिस सकते में है. कारोबारी अपने आंदोलन को वापस ले, इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है. एसडीओ मृत्युंजय कुमार इस प्रयास में लगे हैं. पुलिस ने वार्ड पार्षदों के साथ बैठक कर दुकान को खुलवाने की अपील की है. पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी निर्दोष को गिरफ्तार नहीं किया जायेगा और न ही उन पर कोई कार्रवाई होगी. पुलिस इंस्पेक्टर बालेश्वर राय ने एक-एक वार्ड के पार्षदों से उनकी बातों को सुना तथा उन्हें भरोसा दिला कर शहर की दुकानों को खुलवाने की अपील भी की.
देर शाम को शुरू हुई बैठक में पार्षद हरेंद्र चौधरी, जयहिंद प्रसाद, मुन्ना राज, दुर्गेश कुमार, अधिवक्ता ज्योति वर्णवाल, प्रभु प्रसाद, अरुण गुप्ता, शैलेश प्रसाद, चंद्रमोहन पांडेय, बब्लू पांडेय समेत शहर के प्रबुद्ध लोग भी शामिल थे.

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