जाली स्टांप से बन रहा शपथपत्र

फर्जीवाड़ा. कचहरी रोड में फुटपाथ पर सरेआम बिक रहा जाली स्टांप जाली स्टांप की स्कैन कॉपी. जिले में जाली स्टांप का कारोबार चरम पर है. शहर में प्रतिदिन 1.8 लाख के जाली स्टांप का कारोबार चल रहा है. इस कारोबार में कई माफिया शामिल हैं. गोपालगंज : जिले में जाली स्टांप से शपथपत्र बन रहे […]

फर्जीवाड़ा. कचहरी रोड में फुटपाथ पर सरेआम बिक रहा जाली स्टांप

जाली स्टांप की स्कैन कॉपी.
जिले में जाली स्टांप का कारोबार चरम पर है. शहर में प्रतिदिन 1.8 लाख के जाली स्टांप का कारोबार चल रहा है. इस कारोबार में कई माफिया शामिल हैं.
गोपालगंज : जिले में जाली स्टांप से शपथपत्र बन रहे हैं. कचहरी रोड में फुटपाथ पर सरेआम जाली स्टांप बिक रहे हैं. फॉर्म, पंचांग, किताब आदि की दुकानों पर जाली स्टांप सरेआम बिक रहे हैं. कचहरी रोड में एक दर्जन से अधिक दुकानों पर जाली स्टांप का कारोबार चल रहा है. जाली स्टांप सिर्फ शपथपत्र में ही नहीं बल्कि कोर्ट फीस के रूप में भी हाकिम के सामने पहुंच रहे हैं. यह कारोबार पिछले छह माह से चल रहा है. अब तो फल और जूस बेचने वाले भी जाली स्टांप के कारोबार में जुड़ गये हैं. फाॅर्म बेचने वाले सरेआम जाली स्टांप बेच रहे हैं. इस कारोबार में कई माफिया लगे हुए हैं, जिनकी फुटपाथों पर दर्जन भर दुकानें सजती हैं.
कॉपी, किताब एवं रोजगार फॉर्म बेचने की आड़ में जाली टिकट बेच कर आर्थिक रूप से सरकार को चोट पहुंचा रहे हैं. इस खेल से स्टांप विक्रेताओं के कारोबार पर गंभीर असर पड़ा है. कारोबारी सौ रुपये के स्टांप को शपथपत्र के लिए बाजाप्ता एफिडेविट के साथ सौ रुपये में बेच दिया जाता है. नोटरी पब्लिक को भी जाली स्टांप सप्लाइ हो रहा है. प्रशासन की तरफ से इन पर कार्रवाई नहीं होना जिम्मेवार अधिकारियों को संदेह के कठघरे में खड़ा करता है.
यहां उपयोग हो रहा जाली टिकट : सेल लेटर, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, भू-स्वामित्व प्रमाणपत्र, बिजली कनेक्शन के लिए फॉर्म पर भी जाली टिकट ही मिल रहा है. वहीं, विभिन्न शपथपत्रों में जाली टिकट का उपयोग किया जा रहा है. जाली टिकट के इस खेल में सीवान और गोरखपुर से भी नेटवर्क जुड़ा हुआ है, जो जाली टिकट कंप्यूटर से प्रिंट कर यहां सप्लाइ कर रहे हैं. इस कारोबार में कचहरी रोड पर ही नहीं बल्कि सभी प्रखंड मुख्यालयों में भी फर्जी टिकट बेचनेवाली लगभग एक दर्जन दुकानें हैं. प्रखंड मुख्यालयों पर बिकनेवाले स्टांप पूरी तरह से जाली हैं.
जाली स्टांप का प्रतिदिन कारोबार 1.8 लाख का
जाली टिकट की पहचान है आसान : जाली टिकट की पहचान करना भी आसान है. जाली स्टांप पर पानी में डूबो कर रूई या कपड़ा रगड़ने पर उसका कलर छूटता है, जबकि असली टिकट पर भीगा हुआ कपड़ा रगड़ने पर उसका कलर नहीं छूटता.
40 लाख का पकड़ा गया था स्टांप
जाली स्टांप का कारोबार पिछले 10 वर्षों से चल रहा. तत्कालीन एसडीओ राजीव रंजन के नेतृत्व में डीएम बाला मुरुगन डी ने वर्ष 2011 में टीम गठित कर छापेमारी कर 40 लाख का स्टांप जब्त किया था. इसमें नौ लोग गिरफ्तार किये गये थे. इसके कारण कुछ दिनों के लिए जाली स्टांप का कारोबार थमा था.
लेकिन उसके बाद फिर से यह कारोबार चरम पर पहुंच गया है.
जांच कर होगी कार्रवाई
जाली स्टांप बेचे जाने की जानकारी मुझे नहीं है. अगर ऐसा है, तो इसकी जांच करायी जायेगी. जांच में गड़बड़ी पाये जाने पर कार्रवाई की जायेगी.
धनंजय कुुुमार, प्रभारी एसडीओ, गोपालगंज

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