पदाधिकारियों ने की महापरीक्षा की जांच
महापरीक्षा के लिए जांच टीम गठित
गोपालगंज : साक्षर भारत के तहत असाक्षर महिलाएं महापरीक्षा देकर साक्षर बन गयीं. उनके माथे पर से अनपढ़ होने का कलंक धुल गया. परीक्षा देकर निकली लुहसी के तेतरी काकी अब अंगूठे का निशान नहीं देगी. बल्कि अब साइन करेगी. इसका खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी. जिले में बुनियादी साक्षरता महापरीक्षा पदाधिरियों की देखरेख में संपन्न हो गयी. नवसाक्षरों ने इसमें बढ़ -चढ़ कर हिस्सा लिया. परीक्षा का संचालन जिले के 234 नोडल परीक्षा केंद्रों पर संपन्न हुआ. इसमें साक्षर भारत व महादलित , दलित , अल्पसंख्यक , अति पिछड़ा वर्ग व अक्षर आंचल योजना के नवसासक्षरों ने भाग लिया. महापरीक्षा के सफल संचालन के लिए जिले में दो जांच टीमें गठित की गयी थीं.
प्रथम टीम में जिला मुख्य समन्वयक सुमन कुमार व जन शिक्षा सहायक चंदन कुमार, तो दूसरी टीम में डीपीओ साक्षरता कपिलदेव तिवारी व एसआरजी सुनील कुमार द्विवेदी थे. महापरीक्षा को लेकर जिला साक्षरता कार्यालय ने कंट्रोल रूम के रूप में काम किया. इसमें प्रतिनियुक्त कर्मी अनु कुमार वर्मा, अशोक कुमार,मुखदेव महतो व कृष्णचंद्र राम महापरीक्षा की खबर लेते रहे. महापरीक्षा की जांच पटना से आये स्टेट प्रतिनिधि आनंद कुमार व राज कुमार ने थावे प्रखंड के लोक शिक्षा केंद्र राजकीय बुनियादी विद्यालय थावे, मध्य विद्यालय धतिवना व मध्य विद्यालय थावे, मध्य विद्यालय व मध्य विद्यालय विदेशी टोले की जांच की.
इन लोगों ने सांसद आदर्श ग्राम खैराआजम के लोग शिक्षा केंद्र तथा आदर्श लोक शिक्षा केंद्र एकडेरवां की भी जांच की. इनके साथ डीपीओ साक्षरता कपिलदेव तिवारी , जिला मुख्य समन्वयक सुमन कुमार थे. वहीं दूसरी तरफ डीपीओ साक्षरता श्री तिवारी ने फुलवरिया ,भोरे व उचकागांव प्रखंडों के लोक शिक्षा केंद्र मध्य विद्यालय भोरे, मुरार बतरहा, कपरपुरा, सांखे तथा उचकागांव की जांच की. महा परीक्षा को लेकर नवसाक्षरों में काफी उत्साह देखा गया.
25 हजार 260 का था लक्ष्य : इस महा परीक्षा के लिए 25 हजार 260 नवसाक्षरों को परीक्षा दिलाने का लक्ष्य निर्धारित था. इसमें साक्षर व दलित, महादलित , अल्पसंख्यक , अति पिछड़ा वर्ग व अक्षर आंचल योजना के तहत अलग- अलग लक्ष्य निर्धारित किये गये थे.
बुनियादी साक्षरता के तहत नवसाक्षर 21 हजार जबकि दलित, महादलित, अल्पसंख्यक, अतिपिछड़ा वर्ग व अक्षरआंचल योजना के तहत नवसाक्षरों का लक्ष्य चार हजार 260 निर्धारित था. बुनियादी महा परीक्षा को लेकर 24 हजार 570 नवसाक्षरों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया तथा इतने ही इस महापरीक्षा में शामिल हुए.
