सिर पर मौत की तरह मंडरा रहे हाइटेंशन तार

लापरवाही . िकसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही बिजली कंपनी गोपालगंज : शहर का रिहायशी इलाका राजेंद्र नगर. यहां कहीं बांस के सहारे विद्युत तार हैं, तो कहीं सड़क से महज आठ फुट पर लटक रहे हैं. कई ऐसे घर हैं जिनकी छतों से हाइटेंशन तार मौत की तरह मंडरा रहे हैं. यहां हर […]

लापरवाही . िकसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही बिजली कंपनी

गोपालगंज : शहर का रिहायशी इलाका राजेंद्र नगर. यहां कहीं बांस के सहारे विद्युत तार हैं, तो कहीं सड़क से महज आठ फुट पर लटक रहे हैं. कई ऐसे घर हैं जिनकी छतों से हाइटेंशन तार मौत की तरह मंडरा रहे हैं. यहां हर पर लोगों के सिर पर मौत मंडराती रहती है. इसे हटाने के लिए कई बार फरियाद भी की जा चुकी है.
राजेंद्रनगर के लोग दहशत में जीते हैं. आंधी-पानी होने पर लोगों की धड़कन बढ़ जाती है. लोग घर से बहार निकल जाते हैं. यह स्थिति अकेले राजेंद्रनगर की नहीं है, बल्कि जिले में सौ ऐसे गांव हैं, जहां तार बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं. विगत स्थितियों पर नजर डाली जाये, तो अब तक एक दर्जन से अधिक की मौत और एक हजार से अधिक के घर राख हो चुके हैं. जिले में यह खतरा अब भी मंडरा रहा है.
एक दर्जन से अधिक की जाचुकी है जान
केस स्टडी 1 – महम्मदपुर थाने के माधोपुर गांव में विगत सप्ताह शॉट सर्किट से लगी आग में एक गाय की मौत हो गयी, वहीं ढाई लाख से अधिक की संपत्ति जल गयी. इसके लिए बिजली कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन कर सड़क को जाम भी कर दिया था, जिसमें पुलिस को पहल करनी पड़ी थी.
केस स्टडी 2 – रतनसराय में बिजली कंपनी की लापरवाही से लगाये गये तार के टूटने से दिसंबर में 19 वर्षीय युवक की मौत हो गयी थी. जब ग्रामीण उग्र हुए, तो कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी थी.
केस स्टडी 3 – वर्ष 2014 के सितंबर में शहर स्थित शिक्षा कार्यालय के सामने जर्जर तार से पोल में विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण मांझा के एक किसान की मौत हो गयी. वह शहर में खरीदारी करने आया था.
केस स्टडी 4- बरौली थाने के परसौनी गांव में वर्ष 2014 में तार के संपर्क में आ जाने से ट्रक चालक और खलासी की मौत हो गयी थी.
बिजली कंपनी के खिलाफ दो दिनों तक आंदोलन चला. दोनों पश्चिमी चंपारण के रहनेवाले थे.
क्या हैं घटना के कारण
पुराने तार हो चुके हैं बेकार
घनी बस्ती में तार रोटेशन का निर्धारित नहीं है शिड्यूल
समय पर नहीं होती देख-रेख
बचने के क्या हैं उपाय
लटकते तारों से दूरी बनायी जाये
घर के ऊपर से हाइटेंशन तार गुजर रहे हों, तो विभाग को सूचित करे.
विभाग को व्यवस्था पर देना होगा ध्यान
दो लाख तक है मुआवजे का प्रावधान
बिजली से क्षति होने पर अधिकतम दो लाख रुपये तक मुआवजे का प्रावधान है. यदि किसी व्यक्ति की मौत करेंट की चपेट में आने से होती है, तो उसे दो लाख का मुआवजा मिलना है. अंग भंग होने पर उसके अनुसार राशि मिलनी है, लेकिन जिले में अब तक किसी को भी मुआवजा का लाभ नहीं हुआ है. आज भी लोग मुआवजे के इंतजार में हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
जर्जर तार एवं पोल को बदलने का काम क्रमबद्ध तरीके से चल रहा है. ग्रामीण क्षेत्र में बीआरजीएफ के अंतर्गत कार्य हो रहा है .
तथा शहरी क्षेत्र में अलग से कार्यकारी कंपनी को जिम्मा मिला हुआ है. एक वर्ष के अंदर कहीं जर्जर तार नहीं रहेगा.
प्रदीप कुमार, कार्यपालक अभियंता, प्रोजेक्ट बिजली कंपनी गोपालगंज

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