मौसम की मार. पानी का लेयर गया पाताल में, लोगों को परेशानी
इस गरमी में बूंद-बूंद पानी के लिए तड़पना पड़ेगा. पशु-पक्षी से लेकर जानवर तक पानी के लिए परेशान हैं. चापाकल भी जवाब देने लगे हैं.
गोपालगंज : भीषण गरमी से पानी का लेयर तेजी से नीचे जा रहा है. चापाकलों से पानी निकलना बंद हो गया है. अधिकतर चापाकल सूख चुके हैं. गांव में भी पानी का संकट गहराने लगा है. गांव की 80 फीसदी आबादी चापाकलों पर आश्रित है.
ऐसे में अचानक पानी का लेयर ढाई से तीन फुट नीचे चला गया है. स्थिति इसी तरह मई में बनी रही, तो यह तय है कि गांव में पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जायेगी. पीएचडी ने भी लेयर के तेजी से गिरने की बात कही है. धायक, पंचायत, विधान पार्षद, जिला पार्षद मदों से लगाये गये गांवों के 80 फीसदी चापाकल खराब हैं. मरम्मत के अभाव में सभी चापाकल अनुपयोगी बन गये हैं.
सूत्रों की मानें, तो जिले में 86980 चापाकलों में 52290 चापाकल छोटी-छोटी मरम्मत के अभाव में बेकार पड़े हैं. इस पर किसी तरह की कोई व्यवस्था विभाग की तरफ से नहीं है.
चापाकलों का सूख गया हलक
जहर उगल रहे चापाकल
अधिकतर निजी चापाकल जहर उगल रहे हैं. चापाकल को 30-40 फुट पाइप लगा कर चालू कर दिया गया है. इसके कारण धरती के भीतर की पहली परत का पानी लोग पीने को विवश हैं. पानी में तमाम तरह के रसायन धरती के पहले परत से प्राप्त होते हैं, जो सेहत के लिए नुकसान कर रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस जिले में 140 फुट से नीचे का पानी ही पीने लायक है, जिसका टीडीएस 120-150 के आसपास है.
जबकि 30-40 फुट पाइप लगा पानी का टीडीएस 250-300 है.
एक नजर में आंकड़ा
ग्राम पंचायतों की संख्या- 234
परिवार की संख्या – 572111
जनसंख्या – 29,569,60
क्या कहते हैं अधिकारी
पानी का लेयर तेजी से गिर रहा है. फिलहाल 17-18 फुट का लेयर है, जबकि 20 फुट से नीचे लेयर गिरने पर पानी का भीषण संकट उत्पन्न हो सकता है.
मो सकीम, जेइ पीएचडी, गोपालगंज
