लापरवाही . जलमीनार चालू हो जाये, तो 10 लाख की आबादी का दूर हो सकता है जलसंकट
पूरा राज्य जल संकट से जूझ रहा है. जिस तरह पानी को हम बरबाद कर रहे हैं, आनेवाले दिनों में लातूर से भी बुरी स्थिति हो सकती है. पानी के प्रति अब भी जागरूक नहीं हुए, तो पीने के लिए भी पानी नसीब नहीं होगा. प्रभात खबर ने जल सत्याग्रह कॉलम की शुरुआत की है.
गोपालगंज : पारा रिकाॅर्ड तोड़ने के करीब है. अधिकतम पारा 43 से ऊपर है. न्यूनतम पारा 26 पहुंच चुका है. ऐसे में पेयजल संकट से पूरा जिला जूझ रहा है. जिले में 27 जलमीनारें बन चुकी हैं. इनमें से दो बंद हैं तथा पांच पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित हैं.
पीएचइडी 20 जलमीनारों के चालू होने का दावा कागज में कर रहा है.
विभाग के रिकाॅर्ड में ये जलमीनार प्रतिदिन लगभग 15 लाख लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा रही है. वास्तविकता पर नजर डालें, तो पीएचइडी में स्थित जलमीनार फुलवरिया, सेलारकला, मीरगंज, लक्षवार को छोड़ दें, तो बाकी किसी भी जलमीनार से एक बूंद भी पानी लोगों को नसीब नहीं होता.
बंद पड़ी जलमीनारों को अगर पंचायती राज व्यवस्था के हाथों सौंप दिया जाये, तो यकीन मानें, 15 लाख लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा.
जगह-जगह पाइप फटे रहने से पेयजल की हो रही बरबादी
महज पांच फीसदी घरों तक पहुंचता है पानी
शहर की पाइप लाइन 50 साल पुरानी है. शहर में तब आबादी 8-10 हजार थी. आज शहर की आबादी 1.26 लाख के आसपास है. शहर की बढ़ती आबादी के बीच पांच फीसदी घरों में भी शुद्ध पेयजल पाइप लाइन के स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. पाइप जगह-जगह फटा हुआ है. फटे हुए पाइप को ठीक करने में विभाग नाकाम साबित हो रहा है.आंकड़ों के अनुसार शहर के प्रत्येक चौक के आसपास दो ऐसे मोटर सर्विस सेंटर हैं, जहां वाहन धोने का व्यवसाय चलता है.
इसमें रोज हजारों लीटर पानी बरबाद किया जा रहा है. हाइवे के किनारे भी प्रतिदिन 25-30 टैंकर पानी बरबाद किया जा रहा है.
कहते हैं अधिकारी
विभागीय दोष के कारण कहीं भी जलमीनार बंद नहीं है. जो जलापूर्ति के लिए कनेक्शन नहीं ले रहे हैं, जलमीनार को स्थानीय निकाय को सौंप दिया गया है. वह कैसे चलायेगा यह उनकी जिम्मेवारी है. तकनीकी रूप से किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी जलमीनार में नहीं है.
अशोक कुमार, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी
बंद पड़ी जलमीनार
सिरसा, बंगरा,
यहां हैं चालू जलमीनार
दिघवा उत्तर, विजयीपुर, गम्हारी, बुचेया, मानिकपुर,फुलवरिया, शेर, पंचदेवरी, सेलारकला, बड़कागांव, बथुआ बाजार, भोरे, मानिकपुर-2, कुचायकोट, उचकागांव, सिधवलिया, दिघवा दक्षिण, लक्षवार, रतनपुरा, जमुनहा बाजार
पुनर्निर्माण के लिए भेजी गयी योजना
मांझा, थावे, सासामुसा, सिरसा तथा बंगरा
