उपेक्षा : अपनों ने मुंह फेरा, तो सदर अस्पताल में सांसे गिन रहे बुजुर्ग
सुनहरे भविष्य की सपना लिये जिसके लिए मेहनत करते रहे. उन्हें पढ़ाया-लिखाया, मुकाम पर पहुंचाया. हर दुखों से संघर्ष करते रहे. आज जब इनकों सहारा की वक्त आयी तो अपनों ने मुंह फेर लिया. जीवन की सांझ में अपनों का धोखा इन्हें पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है.
जिस बेटा को पालने में मां-बाप को पूरा जीवन लगा देना पड़ता है. वही बेटा जब मुकाम हासिल कर ले रहा तो, अपने बुजुर्ग मां-बाप को सहारा देने के बजाय मरने के लिए छोड़ दे रहा. सदर अस्पताल में पहुंचे तीन मरीजों की दशा देख मानवता कांप उठती है. ‘प्रभात खबर’ की मिशन है कि बुजुर्गों को सम्मान और प्यार मिले. जिसके वे हकदार हैं. प्रस्तुत है आंखों देखी स्थिति पर अधारित पीड़ित बुजुर्गों की यह रिपोर्ट.
इलाज के लिए लाया और छोड़ कर चला गया : पत्नी के बीमार होने पर चार माह पहले इलाज के लिए उसका पति सदर अस्पताल में लेकर आया था. इलाज के बाद चिकित्सकों ने महिला को फालिस मारने की रिपोर्ट दी. फालिस मारने की जानकारी होने पर इमरजेंसी वार्ड में ही पत्नी को छोड़ कर पति फरार हो गया. जिंदगी भर साथ निभाने का वचन देनेवाला ही बीमारी के समय जब जरूरत थी, तो दगा दे गया. उधर, स्वास्थ्य कर्मियों ने महिला को पागल का रूप देकर सिविल सर्जन कार्यालय के सामने नाला के पास छोड़ दिया.
महिला खुद को सिधवलिया थाने के ब्रह्मस्थान के पास की रहनेवाली बता रही है. पति के दगाबाजी के बावजूद पत्नी अपने पूराने ख्यालों पर कायम है. पति का नाम जानते हुए भी पत्नी होने का फर्ज निभा रही है और पति का नाम बोलना नहीं चाह रही है. बसे उसे केवल इंतजार है, तो अपनों के आने की. वह बस उसके इंतजार में पलकें बिछायी हुई है.
जवानी में काम कराया, बुढ़ापा में छोड़ दिया : बंगाल के बर्द्वमान जिले के आसनसोन थाना क्षेत्र के रहनेवाले 75 वर्षीय बहादुर कुमार बचपन में ही घर से भाग कर बिहार आ गये थे. बरौली के रतनसराय में रामाजी गुप्ता के घर रहते थे. रामाजी गुप्ता का होटल बरौली थाना चौक पर था.
पूरी जिंदगी होटल में काम कर बिता दी. जब शरीर दुरुस्त था, तो मालिक का विश्वासपात्र था. उसे परिवार के सदस्य की तरह सम्मान मिलता था. बीते 15 फरवरी को थाना चौक के पास अज्ञात वाहन ने बुजुर्ग को अपाहिज कर दिया. इनका एक पैर पूरी तरह से फैक्चर हो चुका है. हादसे के बाद होटल मालिक ने अस्पताल लाकर छोड़ दिया. दुबारा बुजुर्ग को पहचान करने से भी इनकार कर दिया है.बुढ़ापा में बुजुर्ग बहादूर अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं.
रिक्शा खिंच कर बेटों को पाला, आज उसी ने मुंह फेरा
नगर थाना के अरार गांव के रहनेवाले बाबू लाल राम अपनी बेटों की परवरिश के लिए पूरी जिंदगी रिक्शा खिंचने में लगा दी. बेटों की परविश करने के साथ ही उनका विवाह भी धूमधाम से कर दी.
आज बाबू लाल राम बुजुर्ग होने के कारण बीमार हो चुके हैं. बुढ़ापा में बेटों से सहारा की जरूरत पड़ी, तो आज वही बेटे मुंह फेर लिये. अस्पताल के पुरुष वार्ड में लाचार बेटी के साथ बाबू लाल राम जिंदगी की आखिरी सांसे गिन रहे. बेटी भी मोतियाबिंद से पीडि़त है. लाल बाबू का दामाम मोतियाबिंद होने के कारण उसे छोड़ दिया है. बेटी के साथ बुजुर्ग लाल बाबू राम जिंदगी काट रहे.
