गोपालगंज : रसोई गैस सब्सिडी बचाने के लिए इतना काफी नहीं होगा कि उपभोक्ता अपनी आय को गैस एजेंसी या वेबसाइट पर दर्जा करा दे. अगर पुरुष के नाम से कनेक्शन है, तो उसे अपने साथ-साथ अपनी पत्नी का पैन नंबर देना होगा और अगर उपभोक्ता स्त्री है, तो उसे अपने पति का पैन नंबर देना होगा.
ऐसा सिर्फ पति-पत्नी के लिए ही नहीं, बल्कि उपभोक्ता और परिवार के अन्य ऐसे सदस्यों का पैन नंबर मुहैया कराने की जरूरत होगी. रसोई गैस कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं के मोबाइल पर एसएमएस के जरिये सूचना दी जा रही है. दस लाख रुपये सालाना आय होने पर रसोई गैस सब्सिडी बंद होने की खबर मिलते ही उपभोक्ताओं में खलबली मच गयी है. हर एजेंसी पर उपभोक्ता जानकारी या फाॅर्म लेने के लिए पहुंचने लगे हैं.
फाॅर्म का फॉर्मेट देख लोग चकरा गये. पति व पत्नी का पैन नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज कराने का हवाला दिया गया है. ग्रामीण उपभोक्ताओं और महिलाओं के पैन नंबर न होना आम बात है. जिन लोगों के पास पैन नंबर है, उनमें बड़ी संख्या ऐसी है जो रिटर्न नहीं भरते.
इन स्थितियों में उनको दस लाख रुपये की आय वाली कैटेगरी में डाल कर सब्सिडी ऑटोमेटिक बंद हो जायेगी. फार्मेट में बीते वित्तीय वर्ष में आय को आयकर अधिनियम 1961 के हिसाब से दर्ज करने का निर्देश डीलरों को दिया गया है.
