गोपालगंज : शहर में तमाम दवा की दुकानें नशे के कारोबार का मुख्य अड्डा न गयी हैं. बिना परची के इन दवा दुकानों में प्रतिबंधित दवाएं बेची जा रही हैं. आसानी से यह दवाइयां मुहैया होने से नशे का कारोबार फल-फूल रहा है. इंजेक्शन और नींद की गोलियां यूं ही थमा दी जाती हैं. कभी-कभार छापेमारी में इसका खुलासा भी हो चुका है,
फिर भी अफसर खामोश हैं. तमाम युवा नशे की चपेट में आते जा रहे हैं. फुटकर दवा की दुकानें कुछ एरिया में नशे के लिए बदनाम हो चुकी हैं. शहरी इलाके से लेकर ग्रामीण इलाकों तक खांसी के सीरप नशे के रूप में अरसे से इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके साथ नशे के इंजेक्शन लगाने का भी इंतजाम दवा की दुकानों पर है. फुटकर ही नहीं दवा की थोक दुकानों पर ऐसी दवाइयां बिकती हैं जिनको परची पर दिया जाना चाहिए.
पिछले पांच साल में शहर और ग्रामीण इलाके के दर्जन भर दुकानों पर वर्जित दवाइयां बेचते पकड़ी गयी हैं. नशे के आदी युवा ऐसी कुछ दुकानें चिह्नित कर रखा हैं. वह संबंधित दुकानों पर पहुंचते हैं और इशारा करते ही इंजेक्शन भर कर लगा दिया जाता है. कुछ नशेड़ी तो इंजेक्शन खरीद कर लाते हैं बाद में खुद लगाते हैं. तमाम नशे के आदी युवा ऐसी दुकानों पर पहुंच कर इंजेक्शन लगवाते हैं और डोज लेकर वापस लौट जाते हैं. इसके लिए जो विभाग बना है वह चंद छापों तक सीमित है. प्रशासनिक अफसर भी सब कुछ जानते हुए खामोश हैं.
