हमें सरकार से कोई अनुदान नहीं मिलता : आइओए

हमें सरकार से कोई अनुदान नहीं मिलता : आइओए नयी दिल्ली.आइओए को अनुदान देने के सरकार के दावे को ‘गुमराह करने वाला ‘ बताते हुए शीर्ष खेल संस्था ने शुक्रवार को खेल मंत्रालय से ऐसा नहीं करने के लिये कहा क्योंकि पैसा बड़े खेल आयोजनों में खिलड़ियों के खर्च के लिये इस्तेमाल होता है. खेल […]

हमें सरकार से कोई अनुदान नहीं मिलता : आइओए नयी दिल्ली.आइओए को अनुदान देने के सरकार के दावे को ‘गुमराह करने वाला ‘ बताते हुए शीर्ष खेल संस्था ने शुक्रवार को खेल मंत्रालय से ऐसा नहीं करने के लिये कहा क्योंकि पैसा बड़े खेल आयोजनों में खिलड़ियों के खर्च के लिये इस्तेमाल होता है. खेल मंत्रालय आम तौर पर आइओए को अनुदान नहीं देता है, लेकिन ओलिंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल के खेलने की किट, समारोहों की किट, हवाई किराये और रहने का खर्च उठाता है. मंत्रालय ने 22 दिसंबर को जारी बयान में कहा था कि उसने 2012-13 में आइओए को अनुदान के तौर पर 2, 28 , 48 , 524 रुपये और 2014-15 में 16,93,44,359 रुपये जारी किये. आइओए का कहना है कि मंत्रालय ने इसका फायदा इस हद तक उठाया है कि अदालत में भी कहा है कि सरकार आइओए पर इस आधार पर खेल आचार संहिता लागू कर सकता है कि उसे सरकार से अनुदान मिलता है.आइओए ने कहा कि वह सोच रहा है कि मंत्रालय से खिलाड़ियों के इन खेल आयोजनों में होनेवाले खर्च को उन्हें आइओए के मार्फत नहीं, बल्कि व्यक्तिगत तौर पर देने के लिये कहे. आइओए महासचिव राजीव मेहता ने कहा कि यह गुमराह करनेवाली बात है. मंत्रालय सरकारी दस्तावेजों में जो अनुदान दिखा रहा है , वह इन खेल आयोजनों में खिलाड़ियों पर हुआ खर्च है. इसे आइओए को अनुदान कैसे कहा जा सकता है. मेहता ने कहा कि आइओए खेल मंत्रालय से एक रुपया या किसी तरह का अनुदान नहीं लेता है. सभी को पता है कि फ्लाइट बुकिंग और अन्य बंदोबस्त निजी एजेंसियां करती है और आइओए सिर्फ मध्यस्थ का काम करता है. उन्होंने कहा कि वह छह महीने पहले ही खेल मंत्रालय को इस संदर्भ में पत्र लिख चुके हैं और 23 दिसंबर को गुवाहाटी में हुई आइओए की सालाना आम बैठक में भी इसे मंजूरी दी गयी. उन्होंने कहा कि खेल मंत्रालय ने अदालत के सामने दावा किया कि आइओए को सरकार से अनुदान मिलता है लिहाजा उस पर खेल आचार संहिता लागू होनी चाहिये. हमें सरकार से कोई अनुदान नहीं मिलता और हम ओलिंपिक चार्टर से बंधे हैं. हमें सरकार से इस चलन को खत्म करने को कहना होगा. सरकार और आइओए के बीच बढ़ते तनाव का कारण खेल आचार संहिता के दिशा निर्देश है, जिसके तहत सरकार ने अखिल भारतीय टेनिस संघ और भारतीय जूडो महासंघ की मान्यता रद्द करने की धमकी दी है. खेल मंत्रालय का कहना है कि एआइटीए और जेएफआइ के अध्यक्ष पद पर अनिल खन्ना और मुकेश कुमार का चुनाव वैध नहीं है, क्योंकि अध्यक्ष बनने से पहले उन्होंने चार साल का ब्रेक नहीं लिया है. खन्ना और कुमार लगातार दो बार सचिव रहने के बाद अध्यक्ष बने हैं.

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