अस्पताल की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

अस्पताल की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल मरीजों को छोड़ दिया जाता है भगवान भरोसे फोटो न. 26 संवाददाता, भोरे भोरे रेफरल अस्पताल कुव्यवस्था को लेकर पहले से ही चर्चित रहा है. यहां व्यवस्था के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति होती है. जबकि, मरीजों को भगवान भरोसे ही छोड़ दिया जाता है. बुधवार की रात […]

अस्पताल की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल मरीजों को छोड़ दिया जाता है भगवान भरोसे फोटो न. 26 संवाददाता, भोरे भोरे रेफरल अस्पताल कुव्यवस्था को लेकर पहले से ही चर्चित रहा है. यहां व्यवस्था के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति होती है. जबकि, मरीजों को भगवान भरोसे ही छोड़ दिया जाता है. बुधवार की रात जन्मी बच्ची एवं उसकी मां को भी अस्पताल प्रबंधन ने भगवान भरोसे ही छोड़ दिया, जिसका परिणाम हुआ कि नवजात की मौत हो गयी. और तो और सारे मानवीय संवेदनाओं को पीछे छोड़ मृत बच्ची को अस्पताल से छोड़ने के लिए भी पैसे ले लिये गये. सुबह जब इसकी सूचना पर प्रभात खबर की टीम अस्पताल पहुंची, तो बिस्तरों पर न तो कोई गद्दे थे, न ही मरीजों के पास कंबल. पूछने पर मरीजों ने बताया कि अस्पताल से कोई व्यवस्था नहीं दी गयी है. जो बिछावन दिख रहे हैं, वह भी हम अपने घर से लाये हैं. अस्पताल की इसी अव्यवस्था के कारण गरीब सुनील चौहान की बेटी मर गयी, किंतु अस्पताल के प्रबंधन ने उसे ठंड से बचने की कोई भी व्यवस्था उपलब्ध नहीं करायी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारी संवेदनाएं सिर्फ पैसों तक ही सीमित है. उस मासूम की जिंदगी का कोई महत्व नहीं, जिसने अभी दुनिया भी नहीं देखी थी. भोरे रेफरल अस्पताल में गद्दे से लेकर कंबल तक की व्यवस्था है, लेकिन आखिर इसे मरीजों के पास उपलब्ध क्यों नहीं कराया जाता. सूत्र बताते हैं कि इसका इस्तेमाल खुद स्वास्थ्य कर्मी करते हैं या पैसा देने वाले मरीजों को इसकी सुविधा दी जाती है.

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