किसी भी पार्टी ने नहीं दिया महिला को टिकट

किसी भी पार्टी ने नहीं दिया महिला को टिकट गोपालगंज. प्रत्येक राजनीतिक दल आधी आबादी के अधिकार को लेकर बढ़-चढ़ कर बातें करता है, लेकिन विधानसभा और लोकसभा का चुनाव आते ही ये हुंकार हवा-हवाई साबित होता है. एक बार फिर यहां विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और इस चुनाव में भी महिला सशक्तीकरण […]

किसी भी पार्टी ने नहीं दिया महिला को टिकट गोपालगंज. प्रत्येक राजनीतिक दल आधी आबादी के अधिकार को लेकर बढ़-चढ़ कर बातें करता है, लेकिन विधानसभा और लोकसभा का चुनाव आते ही ये हुंकार हवा-हवाई साबित होता है. एक बार फिर यहां विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और इस चुनाव में भी महिला सशक्तीकरण की बोल टिकट बंटवारे में कुंद होकर रह गयी है. वह भी तब जब जिला का लिंगानुपात बिहार में सर्वाधिक है. गोपालगंज में प्रति हजार पुरुष पर 1015 महिलाएं हैं. यहां कुल छह विधानसभा सीटें हैं, लेकिन इस बार भी होने जा रहे विधानसभा चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल ने किसी महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि महिलाएं आखिर किस दल भरोसा करे. सर्वाधिक लिंंगानुपात वाले जिले की सभी छह सीटों पर महिलाओं के लिए उनकी सुरक्षा, सबलता और बराबरी का हक दिलाना आसन्न चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है. बात ऐसी नहीं कि यहां महिलाएं राजनीति में नहीं हैं, बल्कि जातीय, क्षेत्रीय, दंबंगई की राजनीति ने इन्हें हासिये पर ला दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जिले की आधी आबादी अब भी अबला है. खास कर बुद्धिजीवी एवं राजनीति में सक्रिय महिलाओं में यह चर्चा जोरों पर है. महिलाओं की यह उपेक्षा आसन्न चुनाव नया गुल खिला सकता है.

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