खेती बाड़ी डेस्क सूखे की मार से जहां यूरिया का बाजार मंदा पड़ गया था, वहीं गत दिन हुई बारिश से इसकी मांग में तेजी आ गयी है. खरीफ फसल के लिए यूरिया की खपत का लक्ष्य विभाग द्वारा निर्धारित किया गया था, जिसके एवज में विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो लक्ष्य के अनुरूप यूरिया की आपूर्ति हुई है.
अब जबकि बारिश हो गयी है, दूसरी ओर यूरिया की कालाबाजारी की शिकायत भी मिल रही है. साथ ही दूसरी ओर अधिक दाम पर यूरिया की बिक्री जारी है. थोक विक्रेता से लेकर खुदरा विक्रेता तक यूरिया बिक्री की मंद पड़ी बिक्री को भुनाने में लगे हैं. अगस्त माह में अधिक यूरिया की जरूरत होती है.शुरू से ही बारिश की स्थिति अच्छी नहीं रही है. जून माह में जहां सामान्य वर्षापात 124.8 मिली मीटर होना था, वहीं मात्र 79.5 मिली मीटर वर्षापात होकर रह गया. वहीं जुलाई में जबकि धान की रोपनी का उत्तम समय होता है,
सबसे अधिक 358.1 मिलीमीटर वर्षापात का लक्ष्य था, जिसके एवज में मात्र 165.7 मिली मीटर ही बारिश हुई. अगस्त में अब तक 18.2 मिली मीटर बारिश हुई है, जबकि कुल वर्षापात 254.9 मिलीमीटर होना है. अगस्त माह धान की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि इसी माह में धान की फसल रोपनी के बाद प्रौढ़ होती है और फसल की अच्छी उपज के लिए किसान खाद का प्रयोग करते हैं. इसके लिए किसान खाद दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं.
