गोपालगंज : प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए ईंट भट्ठों पर सरकार ने जिगजैग तकनीक लगाने का निर्णय लिया था. बिहार पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की अनुमति के बिना ईंट भट्ठों को सरकार की तरफ से बंद करने के आदेश जारी किया गया है, जिससे जिले के 179 ईंट भट्ठों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. जिगजैग तकनीक अपनाने के लिए विभाग ने भट्ठा संचालकों को दो-तीन बार मोहलत देते हुए 31 अगस्त, 2018 तक का मौका दिया था.
204 में महज 35 ने लगाया जिगजैग सिस्टम
गोपालगंज : प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए ईंट भट्ठों पर सरकार ने जिगजैग तकनीक लगाने का निर्णय लिया था. बिहार पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की अनुमति के बिना ईंट भट्ठों को सरकार की तरफ से बंद करने के आदेश जारी किया गया है, जिससे जिले के 179 ईंट भट्ठों पर […]

उसके बाद भागलपुर के कुछ भट्ठा मालिकों ने पटना हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की. याचिका की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने एक वर्ष की मोहलत देते हुए जिगजैग सिस्टम लगाने का आदेश दिया. कोर्ट के आदेश के अनुसार 31 अगस्त, 2019 तक समय खत्म हो चुका है. कोर्ट के निर्णय के बाद जिले के 204 ईंट भट्ठों में से महज 35ट्ट्ठों ने ही जिगजैग सिस्टम को लगाया है.
अधिकतर भट्ठा मालिक आदेशों की परवाह किये बिना ही ईंट भट्ठों को चलाने की तैयारी कर चुके हैं. जो ईंट भट्ठे आज भी पुरानी तकनीक से चल रहे हैं इस कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है. ऐसे में अब विभाग ने भट्ठों का निरीक्षण कर उन पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है.जानकार बताते हैं कि पुरानी तकनीक पर आधारित ईंट भट्ठे की तुलना में नयी तकनीक से तैयार होनेवाली ईंट काफी बेहतर होती है.
पुराने भट्ठे से जहां प्रदूषण ज्यादा होता है, वहीं नयी तकनीक से प्रदूषण में काफी हद तक कमी आती है. वर्तमान में फिक्स चिमनी भट्ठे से ईंट पकायी जाती है. इस तकनीक में ईंट को पकाने के लिए ईंट को पायों में सजाया जाता है और कोयले की झोंकाई बेलचा द्वारा की जाती है. इस तकनीक में कोयला पूरी तरह से जल नहीं पाता है. इस तकनीक से वायु प्रदूषण भी ज्यादा होता है.
पुरानी तकनीक से कम ईंट एक नंबर की निकलती है.
ऐसे भट्ठा मालिकों पर होगी कार्रवाई
बिहार राज्य प्रदूषण परिषद ऐसे ईंट भट्ठा मालिकों पर कार्रवाई की तैयारी में है. बगैर जिगजैग सिस्टम लगा उन्हें ईंट भट्ठा चलाने की अनुमति प्रदूषण परिषद नहीं दे सकता है.
वीरेंद्र कुमार, पीआरओ, बिहार राज्य प्रदूषण परिषद