बरौली : बेटी के जन्म के बाद ही हर मां-बाप उसे डोली में विदा करने का सपना सजाने लगते हैं. नानिया टोली के छह परिवार बेशक गरीब हैं लेकिन इन्होंने भी अपनी-अपनी बेटियों के हाथ पीले कर खुशीपूर्वक विदा करने का सपना संजोये थे, लेकिन ट्रेलर पलटने की घटना से उनका सपना चकनाचूर हो गया. जिन हाथों से पिता बेटियों को डोली में बैठाते, उन्हीं हाथों से जब उनकी अर्थियां पिताओं ने कंधे पर रखीं तो न सिर्फ उनके सहित पूरा परिवार फफक पड़ा, बल्कि वहां उपस्थित सभी रो पड़े.
मचा कोहराम : एक साथ उठीं छह बेटियों की अर्थियां, रो पड़ा पूरा गांव
बरौली : बेटी के जन्म के बाद ही हर मां-बाप उसे डोली में विदा करने का सपना सजाने लगते हैं. नानिया टोली के छह परिवार बेशक गरीब हैं लेकिन इन्होंने भी अपनी-अपनी बेटियों के हाथ पीले कर खुशीपूर्वक विदा करने का सपना संजोये थे, लेकिन ट्रेलर पलटने की घटना से उनका सपना चकनाचूर हो गया. […]

ट्रेलर पलटने की घटना में छह बच्चियों की मौत से पूरा गांव सुबह से मर्माहत तो था ही, जैसे ही बेटियों का शव पोस्टमार्टम के बाद सरेयां नरेंद्र नोनिया टोली में पहुंचा, हर तरफ चीख-पुकार मच गया और वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें भर गयीं. परिवार के कई सदस्य बार-बार बेहोश होते रहे. जब गांव से एक साथ छह बेटियों की अर्थियां निकली तो पूरा गांव रो पड़ा और सरेयां नरेंद्र में कोहराम मच गया. पोस्टमार्टम से शव आने के बाद सभी शवों को ग्रामीण गांव के ही बगल में अंतिम संस्कार के लिए ले गये.
बेटियों के अंतिम संस्कार में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी. चूंकि सभी बेटियां 15 साल से कम उम्र की ही थी इसलिए रीति-रिवाज के अनुसार मुखाग्नि देने के पश्चात उनके शवों को जलाने के बजाय दफना दिया गया. मृत बेटियों को मुखाग्नि उनके पिताओं ने दी. दस दौरान पुरी तरह से माहौल गमगीन रहा. इस दौरान पुलिस तथा प्रशासन के लोग भी मौजूद रहे.
तीन बहन और दो भाइयों में सबसे बड़ी थी लाली
बरौली : नोनिया टोली के जगलाल महतो के पांच बेटे-बेटियों में लाली सबसे बड़ी थी. सोमवार को लाली भी अपने पड़ासियों के साथ बकरी चराने गयी थी. इधर वह सरेयां नरेंद्र मकतब स्कूल में पढ़ाई भी करती थी. बिलखते हुए पिता जगलाल महतो ने बताया कि कौन जानता था कि मेरी सबसे बड़ी बेटी काल के गाल में चली जायेगी.
बड़ी बेटी की मौत के बाद जगलाल का परिवार चीत्कार रहा है, वहीं मां सुद-बुध खो बैठी है.13 वर्षीय काजल कुमारी की मौत से जहां परिवार में कोहराम मचा है, वहीं माता-पिता संग भाई-बहन बिलख रहे हैं.
पिता रमेश महतो मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता था. रमेश को पांच बेटी और दो बेटे हैं. काजल रमेश की तीसरी बेटी थी. बहन की मौत के बाद दो भाई और अन्य चार बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है. धर्मा महतो की 12 वर्षीया बेटी काजल कुमारी को ट्रेलर हादसे रूपी काल के गाल ने निगल लिया है. काजल दो भाई और दो बहनों में सबसे बड़ी थी.
बिलखते हुए धर्मा ने बताया कि खेती और मजदूरी कर मैं बच्चों का लालन-पालन करता था. बेटी मकतब में पढ़ती थी. घर से कह कर गयी कि बकरी चराकर जल्द आ जाऊंगी तब स्कूल जाऊंगी, लेकिन काल ने उसे निगल लिया. धर्मा का परिवार काजल की मौत पर बिलख रहा है.
पांच बहन और एक भाई में किशोर कीहरिकिशोर की पांच बेटी और एक बेटे में दूसरी बेटी थी. विनम्र स्वभाव के कारण परिवार वाले उसे विनीता कहकर पुकारते थे. किशोर ने बिलखते हुए बताया कि मेरी बेटी भी मकतब में पढ़ने जाती थी, लेकिन सोमवार को बकरी चराने चली गयी और उसे ट्रेलर खा गया. अनीता उर्फ विनीता की मौत पर उसके भाई-बहन पूरे दिन रोते रहे. वहीं मां का चीत्कार थमने का नाम नहीं ले रहा है.
पड़ोसी और गांव वाले ढांढ़स बंधाने मे लगे हुए हैं. उमेश महतो की बेटी पूनम कुमारी सरेयां नरेंद्र स्थित अपने ननिहाल में पढ़ने के लिए घर से गयी थी. मूल रूप से वह बरौली थाने के बतरदेह गांव की है. उसके नाना राजेंद्र महतो ने बताया कि वह पढ़ने के लिए यहां रह रही थी. पड़ोसी बच्चों के साथ वह बकरी चराने चली गयी.
अब मैं अपनी बेटी का कौन जवाब दूंगा. फिलहाल पूनम की मौत से उसके ननिहाल सरेयां नरेंद्र तथा घर बतरदेह में कोहराम है. बेटी की मौत की खबर पर मां-पिता दोनों सरेयां नरेंद्र पहुंचे.
दो भाइयों के बीच अकेली बहन थी प्रीति
10 वर्षीया प्रीति कुमारी दो भाइयों के बीच इकलौती बहन थी. राजू महतो को दो बेटे तथा एक बेटे थे. अब बेटी की मौत के बाद उसका घर सूना हो गया है. राजू ने बिलखते हुए बताया कि तीन बच्चों में सबसे बड़ी बेटी ही थी और उसे बड़ लाड़-प्यार से पाला था. मैं तो मजदूरी करता हूं, लेकिन बच्चों पर कभी गरीबी का साया नहीं पड़ने दिया.