चावल में धांधली करने वाले चार पैक्स पर एफआईआर का आदेश

गोपालगंज : धान खरीद में इस बार भी पैक्स ने बड़े पैमाने पर धांधली की है. चार पैक्स ने 123 मीट्रिक टन यानी लगभग 26.60 लाख रुपये के चावल की गोलमाल की है. चारों पैक्स ने निर्धारित अवधि में चावल विभाग को उपलब्ध नहीं कराया है. जबकि, इन पैक्स को 31 जुलाई तक विभाग ने […]

गोपालगंज : धान खरीद में इस बार भी पैक्स ने बड़े पैमाने पर धांधली की है. चार पैक्स ने 123 मीट्रिक टन यानी लगभग 26.60 लाख रुपये के चावल की गोलमाल की है. चारों पैक्स ने निर्धारित अवधि में चावल विभाग को उपलब्ध नहीं कराया है. जबकि, इन पैक्स को 31 जुलाई तक विभाग ने चावल जमा करने के लिए अतिरिक्त मोहलत दे रखा था.

उसके बाद भी विभाग को चावल नहीं मिलने पर सहकारिता विभाग ने इसे घोटाला मानते हुए तत्काल प्रभाव से प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है. डीसीओ बबन मिश्र ने बताया कि सिधवलिया प्रखंड के बुधसी, थावे प्रखंड के धतिंगना, भोरे प्रखंड के हुस्सेपुर तथा कटेया प्रखंड के अमेया पैक्स की तरफ से लगभग 123 एमटी चावल विभाग को जमा नहीं कराया गया. इन पैक्स के अध्यक्ष और प्रबंधक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी किया गया है.

कोऑपरेटिव बैंक से जारी है क्रेडिट राशि
किसानों को असुविधा न हो इसके लिए दी सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक से पैक्सों को पांच से 10 लाख रुपये तक का क्रेडिट जारी किया जा चुका है. विभाग को चावल जमा करनेवाले पैक्स अब क्रेडिट की राशि जमा कराने में लगे हैं. इन चारों पैक्सों के द्वारा चावल नहीं जमा कराने के मामले में विभागीय जानकार बताते है कि 31 मार्च को इनके द्वारा ज्यादा खरीद दिखाया गया. उसके बाद चावल की आपूर्ति नहीं की गयी. अगर धान खरीद की पूरी प्रक्रिया की जांच करा दी जाये तो किसानों के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़ा का पोल खुल कर सामने आ जायेगा.
विभाग से 31 जुलाई तक चावल जमा कराने की थी अंतिम तिथि
प्रशासन गंभीर, डीसीओ के आदेश के बाद पैक्स में बढ़ीं मुश्किलें
क्या कहते हैं अधिकारी
धान खरीद कर पैक्स के द्वारा चावल नहीं जमा करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया है. पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधकों पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस मामले की जांच करेगी.
बबन मिश्र, डीसीओ, गोपालगंज
कैसे होता है फर्जीवाड़ा
कागजों में सेटिंग कर किसानों के नाम पर खरीदे जाने वाले धान का खेल अब सामने आने लगा है. इस बार 15 नवंबर से 31 मार्च तक ही धान खरीदने का विभागीय आदेश था. 30 अप्रैल तक मिलरों के यहां से चावल तैयार करा कर विभाग को सौंप देना था. नियमानुसार, वैसे किसानों से धान खरीदना था, जिन्होंने सहकारिता विभाग में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया हो.
उनके धान को सरकार के समर्थित मूल्य पर खरीदना था. कई पैक्स ने किसानों के नाम पर कागजों में धान की खरीदारी कर ली. मिलरों से सेटिंग कर मिलिंग करा लिया और यूपी से चावल मंगाकर विभाग को आपूर्ति कर दिया. इसी रिसाइक्लिंग के चक्कर में धान खरीद में बड़े पैमाने पर धांधली हुई. किसानों के नाम पर भुगतान भी बड़ी आसानी से उठा लिया जाता है. पैक्स खुद भुगतान करते हैं, इसलिए यहां भी आसानी होती है.

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