गोपालगंज : कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहते हैं. इस दिन यमराज के निमित्त पूजा की जाती है. यह पर्व 18 को है. नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहा गया है. इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है, क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले रात के वक्त उसी प्रकार दीयों की रोशनी से रात के अंधेरे को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है, जैसे दीपावली की रात.इस रात दीये जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोक मान्यताएं हैं.
एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दुर्दांत असुर नरकासुर का वध किया था और 16 हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था. इस उपलक्ष में दीये जलाये जाते हैं. पं. चंद्रकिशोर मणि त्रिपाठी के अनुसार इस दिन दीया जलाने से पितरों को परलोक जाने का रास्ता दिखता है, वहीं संतान बाधा विघ्न से वंचित होते हैं.
इस दिन तील का तेल लगा कर स्नान करना चाहिए तथा दक्षिणाभिमुख होकर तिलांजलि देने का नियम है. शाम को दीया जला कर घर के बाहर उत्तर-पश्चिम की दिशा में रखना चाहिए. ऐसा करने से यमराज खुश होते हैं जिससे बाधा विघ्न से मुक्ति मिलती है तथा अपार धन की प्राप्ति होती है.
