सिक्काें की गठरी लेकर भटक रहे ग्राहक
ग्राहकों का सिक्का लेने से दुकानदार बच रहे
गोपालगंज : गांव-शहर-कस्बा हर जगह एक रुपये का सिक्का जी का जंजाल बन गया है. जिनके पास सिक्के हैं, वह गठरी लेकर भटक रहे हैं. दुकानदार इसे लेने से बच रहे हैं. इधर साइबर क्राइम में भी तेजी आयी है. बैंक के भीतर से भी ठगी हो रही है. दरअसल, दोनों ही मामलों में वही लोग फंस रहे हैं, जिन्हें अपने अधिकारों की मुकम्मल जानकारी नहीं है. रुपयों की निकासी और जमा करने के वक्त लापरवाह रहते हैं. ‘प्रभात खबर’ ऐसे कुछ मामले उठा कर सजग कर रहा है.
करीब आठ महीने पहले दस रुपये के सिक्के को नकली बता कर दुकानदारों ने लेना बंद कर दिया था. इसको लेकर आये दिन दुकानों पर लोगों की किचकिच होती थी. इस बार बाजारों में एक रुपये के छोटे सिक्के को नकली बताया जा रहा है. दुकानदार उसे भी लेने से इन्कार कर रहे हैं. इससे फुटकर की समस्या खड़ी हो गयी है. यह समस्या शहर ही नहीं तहसील, कस्बा और गांवों में भी बढ़ गयी है. दुकानदार और ग्राहकों के बीच आये दिन कहा-सुनी हो रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर से आंखें मूंदे हुए है.
सिक्के को लेकर कोई भ्रम नहीं : लीड बैंक के प्रबंधक राजन कुमार ने बताया कि सिक्के को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं है. बैंकों को हाल ही में आरबीआई ने करोड़ों रुपये के सिक्काें की ही खेप भेजी थी. वह बाजार में ही जायेगा. ऐसे में सिक्का के लेन-देन में कोई दुबिधा नहीं होनी चाहिए.
सिक्का नहीं लेने पर कार्रवाई तय
एक रुपये का छोटा सिक्का बंद होने संबंधी कोई आदेश नहीं है. भारतीय करेंसी को न लेना अपराध है. यदि कोई दुकानदार ऐसा करता है, तो नजदीकी थाने में शिकायत करें. ऐसे लोगों पर पुलिस कार्रवाई करेगी. एक रुपये के छोटे सिक्कों के नकली होने की अफवाह फैलायी जा रही है, जबकि बाजार में जो सिक्का है, वह असली है. यदि कोई एक रुपये के छोटे सिक्के को नकली बता कर नहीं ले रहा है, तो गलत है. एक रुपये के छोटे सिक्के आरबीआई की तरफ से जारी किये गये हैं और बाजारों में इसका चलन बरकरार है.
