क्षेत्र की जानकारी नहीं, कर रहे सर्वेक्षण का कार्य
स्वच्छता अभियान की सफलता पर ग्रहण लगता दिख रहा
भोरे : स्वच्छ भारत मिशन एवं लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दो अक्तूबर, 2017 तक जिले को खुले में शौच से मुक्त बनाने को लेकर भोरे में सर्वेक्षण कर रहे सर्वेक्षक अंधेरे में ही तीर चला रहे हैं.
सर्वेक्षकों को अपने क्षेत्र की जानकारी ही नहीं है कि उन्हें किन-किन गांवों का सर्वेक्षण करना है. कुछ सर्वेक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रखंड कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराये गये कार्यालय आदेश में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है कि उन्हें किन-किन गांवों का सर्वेक्षण करना है. हद तो यह है कि सर्वेक्षक जब पंचायत में तैनात नोडल पदाधिकारी से जानकारी मांगते हैं, तो उन्हें भी यह पता नहीं है कि किन-किन गांवों का सर्वेक्षण करना है. ऐसे में यह सर्वेक्षण कार्य कितना कारगर साबित होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है.
बता दें कि भोरे बीडीओ द्वारा भोरे को खुले में शौच से मुक्त बनाने एवं स्वच्छता कार्यक्रम को गति देने को लेकर सभी पंचायतों में जन जागरूकता एवं शौचालय निर्माण कार्य की गति तेज करने को लेकर एक बैठक की गयी थी, जिसमें एक टीम तैयार किया गया था. जिसे सभी 17 पंचायतों में सर्वेक्षण कर रिपोर्ट देनी थी. जिसमें 17 नोडल पदाधिकारी और 45 सर्वेक्षक बनाये गये थे. लेकिन इस बात की जानकारी सर्वेक्षकों और नोडल पदाधिकारियों को नहीं दी गयी कि सर्वेक्षण का कार्य कहां से कहां तक करना है. ऐसे में इस अभियान की सफलता पर ग्रहण लगता दिख रहा है.
