गया जी : वजीरगंज में तोरण द्वार से नाम हटाने पर विवाद, मुखिया ने कार्रवाई को बताया पक्षपातपूर्ण

गया जी जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के बैरिया-लखौआ मार्ग पर नवनिर्मित तोरण द्वार से नाम हटाए जाने को लेकर शुक्रवार को विवाद उत्पन्न हो गया. मुखिया मुरारी यादव और लखौआ गांव के ग्रामीणों ने इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताते हुए आक्रोश जताया है, जबकि बैरिया गांव के लोगों ने पूर्व में इसकी शिकायत की थी.

गया-वजीरगंज मुख्य सड़क से बैरिया होते हुए लखौआ जाने वाली सड़क पर हाल ही में बनाए गए तोरण द्वार से नाम हटाए जाने को लेकर शुक्रवार की दोपहर अचानक विवाद गहरा गया. तोरण द्वार से नाम हटाए जाने की इस प्रशासनिक कार्रवाई पर पंचायत के मुखिया मुरारी यादव सहित लखौआ गांव के तमाम ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी और क्षोभ व्यक्त किया है. ग्रामीणों और मुखिया ने इसे पूरी तरह से एक पक्षीय और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करार दिया है.

मुखिया मुरारी यादव ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि तोरण द्वार पर नाम लिखे जाने को लेकर किसी भी व्यक्ति या पक्ष को कोई आपत्ति थी, तो जिला प्रशासन को सबसे पहले संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनना चाहिए था.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना दोनों पक्षों की बात सुने अचानक तोरण द्वार से नाम हटाया जाना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है. मुखिया ने जानकारी दी कि वे इस मनमानी कार्रवाई के खिलाफ जल्द ही जिला प्रशासन को लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाएंगे.

बैरिया गांव के ग्रामीणों ने की थी लिखित आपत्ति

विदित हो कि इससे पहले बैरिया गांव के निवासियों ने प्रखंड और जिला प्रशासन के पास लिखित आवेदन देकर इस नवनिर्मित तोरण द्वार पर नाम लिखे जाने को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी और प्रशासन से इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी.

इसी शिकायत और मामले के आलोक में शुक्रवार को प्रशासनिक पहल पर तोरण द्वार से नाम को हटा दिया गया, जिसके बाद से दूसरा पक्ष अब विरोध में उतर आया है.

सड़क किनारे पक्के शिलालेखों से दुर्घटना की आशंका पर भी उठे सवाल

दूसरी तरफ, लखौआ गांव के निवासी उपेंद्र यादव, विपिन कुमार, रामबालक यादव, लालू प्रसाद यादव, रंजीत कुमार, दिलीप कुमार, प्रकाश मांझी और सुनील कुमार समेत अन्य कई ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है.

ग्रामीणों का कहना है कि बैरिया से लखौआ गांव तक जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे कई पक्के स्मृति शिलालेख लगाए गए हैं. इन शिलालेखों के सड़क किनारे बने होने के कारण बड़े और छोटे वाहनों के आवागमन में भारी परेशानी होती है और आए दिन सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है.

ग्रामीणों ने रोष जताते हुए बताया कि इस संबंध में अंचलाधिकारी (CO) को पहले भी लिखित आवेदन देकर उचित कार्रवाई की मांग की जा चुकी है, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से मांग की है कि केवल तोरण द्वार ही नहीं, बल्कि सड़क किनारे अवैध रूप से बनाए गए सभी शिलालेखों की भी निष्पक्ष जांच की जाए और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

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By अमरेंद्र कुमार

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