84 साल से बिना भवन चल रहा स्कूल, अब आंधी में उड़ी छत, गया में 52 बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर
शिक्षा विभाग के बड़े-बड़े दावों की पोल गया शहर के इमलियाचक स्थित प्राथमिक विद्यालय में खुल गई है. सोमवार को आई आंधी-बारिश में इस स्कूल के ऊपर एक विशाल नीम का पेड़ गिर गया. गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ.
गया (हरिबंश कुमार की रिपोर्ट). शिक्षा विभाग के बड़े-बड़े दावों की पोल गया शहर के इमलियाचक स्थित प्राथमिक विद्यालय में खुल गई है. सोमवार को आई आंधी-बारिश में इस स्कूल के ऊपर एक विशाल नीम का पेड़ गिर गया. गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन जिस मंदिर के शेड में यह स्कूल चल रहा था, वह पूरी तरह तहस-नहस हो गया. नतीजा यह है कि भीषण गर्मी में 52 मासूम बच्चे अब खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. सबसे शर्मनाक बात यह है कि 1940 (आजादी से पहले) से संचालित इस स्कूल को 84 साल बाद भी अपना भवन नसीब नहीं हुआ है.
3 दिन बाद भी नहीं हटा पेड़, विभागों में फंसा पेंच
हादसे को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन गिरा हुआ पेड़ जस का तस पड़ा है. विद्यालय के प्रधान शिक्षक रोशन कुमार ने बताया कि मंगलवार को ही जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय और वन विभाग को लिखित सूचना दे दी गई थी. इसके बावजूद अब तक कोई पहल नहीं हुई है. स्कूल में कार्यरत दो महिला और दो पुरुष शिक्षकों को भी भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है.
DEO ने नहीं उठाया फोन, वन विभाग ने झाड़ा पल्ला
इस गंभीर मुद्दे पर जब DEO कृष्ण मुरारी गुप्ता और गया वन प्रमंडल पदाधिकारी शशिकांत से संपर्क किया गया, तो दोनों ने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा. व्हाट्सएप पर जानकारी मिलने के बाद वन विभाग ने अपना पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ट कर दिया कि पेड़ काटने और लकड़ी डिपो भेजने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है. इसके लिए शिक्षा विभाग को वन विभाग के रेंजर से ”ट्रांजिट परमिट” लेना होगा. कागजी औपचारिकता के इस खेल में बच्चों की पढ़ाई दांव पर लगी है.
प्रशासनिक रवैये पर फूटा स्थानीय लोगों का गुस्सा
शहर के बीचों-बीच 84 सालों से एक स्कूल का भवनहीन होना पूरे सिस्टम पर तमाचा है. प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये पर भाजपा नेता सुरेंद्र यादव, नीतीश चंद्रवंशी, विजय यादव और संतोष कुमार सहित कई स्थानीय लोगों ने तीखी नाराजगी जताई है. उन्होंने मांग की है कि कागजी खेल बंद कर अविलंब गिरे हुए पेड़ को हटाया जाए और क्षतिग्रस्त शेड की मरम्मत कराई जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और बाधित न हो.