गया जी में मशाल 2.0 के तहत जिला प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग, स्कूलों में खेल प्रतिभाओं की पहचान का सिखाया तरीका

गया जी में जिला शिक्षा और खेल कार्यालय द्वारा मशाल 2.0 के तहत चार दिवसीय जिला प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस दौरान प्रशिक्षकों को पोर्टल संचालन, बैटरी टेस्ट की प्रक्रिया, डेटा अपलोडिंग और खिलाड़ियों की रैंकिंग तय करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि स्कूली स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारा जा सके.

Gaya News : गया जी जिला शिक्षा कार्यालय और जिला खेल कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 'मशाल 2.0' कार्यक्रम के तहत 15 से 18 सितंबर तक चार दिवसीय जिला प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

इस चार दिवसीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यालय स्तर पर छिपी हुई खेल प्रतिभाओं की सटीक पहचान करना, उनका समय पर पंजीकरण करना, परीक्षण करना और चयन की पूरी प्रक्रिया को बेहद प्रभावी व व्यवस्थित बनाना था.

प्रशिक्षण सत्र के दौरान जिले भर से आए जिला स्तरीय प्रशिक्षकों को मशाल 2.0 पोर्टल और इसके डैशबोर्ड के संचालन, स्कूल लॉगिन प्रक्रिया, पासवर्ड रीसेट करने के तरीके, विद्यार्थी पंजीकरण तथा बैटरी टेस्ट की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई. प्रशिक्षकों को बैटरी टेस्ट के विभिन्न चरणों का ऑडियो-वीडियो प्रदर्शन दिखाने के साथ-साथ इसका प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी कराया गया.

बैटरी टेस्ट और पोर्टल संचालन का कराया गया व्यावहारिक अभ्यास

प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों को बैटरी टेस्ट के रॉ डाटा की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने, उसे निर्धारित प्रारूप में सही ढंग से भरने, पीडीएफ अपलोड करने और बच्चों के प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों की रैंकिंग तैयार करने का पूरा व्यावहारिक अभ्यास कराया गया.

इसके अलावा, इंट्रा-स्कूल टीम के निर्माण, फाइनल टीम के गठन और चयनित टीम को सीआरसी (CRC) स्तर पर ऑनलाइन ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को पोर्टल पर हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस के माध्यम से बहुत ही सरल तरीके से समझाया गया. इस दौरान डेटा एंट्री से जुड़ी सामान्य तकनीकी समस्याओं और उनके त्वरित समाधान पर भी विशेष चर्चा की गई.

खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में अहम है प्रशिक्षकों की भूमिका: डीईओ

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कृष्ण मुरारी गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि मशाल 2.0 विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की छिपी खेल प्रतिभाओं को बाहर निकालने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का उचित अवसर देने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण पहल है.

उन्होंने कहा कि इसमें प्रशिक्षकों की भूमिका सबसे अहम होती है. यदि परीक्षण और डेटा अपलोडिंग का काम पूरी शुद्धता और सही तरीके से किया जाएगा, तो प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी रूप से हो सकेगी.

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प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी प्रशिक्षकों से यह अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने संबंधित प्रखंडों में जाकर वहां के शिक्षकों को प्रशिक्षित करें और विद्यालय स्तर पर मशाल 2.0 की सभी गतिविधियों को पूरी सक्रियता के साथ संचालित करवाएं.

जिला शिक्षा कार्यालय और जिला खेल कार्यालय की ओर से सभी प्रशिक्षकों और इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े अन्य पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों से जोड़ने की अपील की गई.

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By हरिबंश कुमार

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