बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान पीएम ने मनमाधो गांव के विक्रम की दुकान से खरीदी थी झालमुड़ी पिता और चचेरे भाई भी चलाते हैं कोलकाता में दुकान मनमाधो गांव की चर्चा पूरे देश में, विकास की उम्मीदें भी जगीं गया- फतेहपुर-1000- टनकुप्पा प्रखंड का मनमाधो गांव में अपने घर के पास खड़े विक्रम के गोतिया.गया- फतेहपुर-1001- टनकुप्पा प्रखंड का मनमाधो गांव में बंद पड़ा विक्रम का घर. प्रतिनिधि, फतेहपुर. गया जी जिले के टनकुप्पा प्रखंड का मनमाधो गांव इन दिनों बंगाल चुनाव के दौरान पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर सुदूर ग्रामीण इलाके में बसे गांव में अधिकांश आबादी अतिपिछड़े वर्ग की है. इस गांव के युवक विक्रम कुमार अपने परिवार के साथ कोलकाता में रहते हैं. विक्रम उस समय सुर्खियों में आ गये, जब बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचे और 10 रुपये की झालमुड़ी खरीदी. मंगलवार को जब मीडिया की टीम गांव पहुंची, तो पूरे गांव में शांति और हैरानी का माहौल था. लोगों को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि उनके ही गांव के युवक की दुकान पर प्रधानमंत्री पहुंचे थे. यह घटना लोगों को किसी सपने जैसी लग रही थी, लेकिन धीरे-धीरे सभी को यह हकीकत समझ में आने लगी. गांव में महिलाओं के बीच इस घटना की खूब चर्चा हो रही है. महिलाएं विक्रम से प्रधानमंत्री की मुलाकात को लेकर उत्साहित हैं. उनका कहना है कि कम-से-कम हमारे गांव के लड़के ने प्रधानमंत्री से मुलाकात तो की. विक्रम के कारण आज हमारे गांव की चर्चा पूरे दुनिया में हो रही है. अब उम्मीद है कि इसी बहाने गांव के विकास की दिशा भी खुलेगी. हालांकि, विक्रम के घर पर ताला लगा हुआ है. अब विक्रम का इंतजार कर रहे ग्रामीण विक्रम के पिता उत्तम साव अपने परिवार के साथ कोलकाता में रहते हैं. गांव में उनका पुश्तैनी मकान मौजूद है. विक्रम की चाची से मुलाकात के दौरान उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे सुजीत और सचिन भी कोलकाता में काम करते हैं. उन्होंने बताया कि इसी घर में विक्रम का जन्म हुआ था और उसका बचपन यहीं बीता है. चाची ने बताया कि एक सप्ताह पहले ही विक्रम की मां गांव आयी थी और परिवार का गांव आना-जाना लगा रहता है. गांव के कुछ लोगों का कहना है कि वे विक्रम से बात करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है. ग्रामीण चाहते हैं कि जब वह गांव आएं, तो उनसे यह जरूर पूछा जाये कि प्रधानमंत्री से उनकी क्या बातचीत हुई और उस समय उनकी मनःस्थिति कैसी थी. विक्रम के बचपन के दोस्त पप्पू ने बताया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात उनके लिए किसी सपने जैसा है. विकास की कमी से जूझ रहा मनमाधो, ग्रामीणों ने जतायी नाराजगी. मनमाधो गांव के लोग विकास और शिक्षा की बदहाली को लेकर मन ही मन पीड़ा महसूस कर रहे हैं. बारिश के दिनों में गांव की सड़कें कीचड़ और पानी से भर जाती हैं, जिससे आवागमन मुश्किल हो जाता है. ग्रामीण पप्पू ने बताया कि बेहतर शिक्षा के लिए बच्चों को 12 से 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. रोजगार की सुविधा नहीं होने के कारण गांव के अधिकांश लोग दूसरे राज्यों में जाकर काम करने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री का कोई दूत, संदेशवाहक या कार्यकर्ता गांव में आकर यहां की स्थिति देखे, तो समझ सकेगा कि लोग किन हालात में जीवन जी रहे हैं.
कोलकाता में विक्रम से प्रधानमंत्री की मुलाकात के बाद मनमाधो में उत्साह
बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान पीएम ने मनमाधो गांव के विक्रम की दुकान से खरीदी थी झालमुड़ी
