गया जी में जून में 1533 बुखार के मामले, मलेरिया की जांच जरूरी; मच्छरदानी और साफ-सफाई से करें बचाव

गया जी जिले में जून माह में बुखार के 1533 मामले सामने आए हैं, जिनमें मलेरिया की पुष्टि हुई है. स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी के इस्तेमाल और साफ-सफाई को बचाव का मुख्य उपाय बताया है. सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की सुविधा उपलब्ध है.

गया जी जिले में डेंगू व चिकनगुनिया के खतरे के बीच मलेरिया का जोखिम भी काफी बढ़ गया है. मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुखार के किसी भी मामले में मलेरिया की जांच आवश्यक रूप से कराने के निर्देश दिए गए हैं.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर मलेरिया की जांच के लिए रैपिड डायग्नोस्टिक किट मुहैया कराए गए हैं. इसके साथ ही, मलेरिया के प्रभावी इलाज के लिए सभी आवश्यक दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई हैं.

जानकारों के अनुसार, मलेरिया का सबसे ज्यादा खतरा बरसात और उसके बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर के बीच अधिक होता है. इस दौरान मलेरिया के साथ-साथ डेंगू व चिकनगुनिया का खतरा भी लगातार बना रहता है. इन वेक्टर जनित बीमारियों फैलाने वाले मच्छर अहle सुबह और सूर्यास्त के समय सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं.

सबसे अधिक मौत का कारण बनता है मलेरिया

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एम.ई. हक ने बताया कि पूरी दुनिया में मच्छरों से होने वाले रोगों से सबसे अधिक संख्या में मौतें होती हैं, जिनमें मलेरिया सबसे प्रमुख है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से मलेरिया के पैरासाइट यानी परजीवी इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं.

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इस गंभीर बीमारी से हर साल पूरी दुनिया में करीब छह लाख लोगों की मौत होती है, जिनमें अधिकतर छोटे बच्चे होते हैं. मलेरिया से बचने का सबसे कारगर उपाय हमेशा मच्छरदानी का इस्तेमाल करना है.

मलेरिया होने पर मरीज को कंपकंपा देने वाली तेज ठंड, तेज बुखार, बदन व सिर में तेज दर्द और अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है. यह बीमारी समय पर इलाज न मिलने पर दिमाग सहित पूरे शरीर पर अपना बुरा प्रभाव डालती है, जो कि जानलेवा साबित हो सकता है.

जून महीने में मिले 1533 बुखार के मामले

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते जून महीने में कुल 1,533 बुखार के मामलों की रिपोर्टिंग दर्ज की गई है. इनमें से बुखार से पीड़ित 1,327 लोगों की मलेरिया की जांच की गई, जिनमें से एक मरीज में मलेरिया की पुष्टि हुई. इसके अलावा, वर्ष 2025 में कुल 18,282 बुखार के मामलों की रिपोर्टिंग हुई थी, जिनमें से 16,766 मामलों में मरीजों की जांच की गई.

इनमें से 15,948 लोगों की आरडीटी (RDT) नामक जांच किट से मलेरिया की जांच की गई, जबकि 818 बुखार के मामलों में रक्त के नमूने (ब्लड सैंपल) लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई गई. इनमें से कुल 30 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई थी, जिनमें 27 पुरुष और 3 महिलाएं मलेरिया से पीड़ित पाए गए थे.

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By जितेद्र मिश्रा

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