एमयू में आयोजित विशेष व्याख्यान में जनसंख्या गतिशीलता एवं सतत संसाधन प्रबंधन पर हुआ मंथन. वरीय संवाददाता, बोधगया. मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग द्वारा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में जनसंख्या गतिशीलता और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात भूगोलविद् प्रो रास बिहारी प्रसाद सिंह थे.
वैश्विक जनसंख्या परिदृश्य और भारत की युवा शक्ति
अपने व्याख्यान में प्रो रास बिहारी प्रसाद सिंह ने वैश्विक जनसंख्या परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि रूस, जापान, अमेरिका तथा ब्रिटेन जैसे अनेक विकसित देशों में जनसंख्या वृद्धि दर ऋणात्मक अथवा अत्यंत निम्न स्तर पर पहुंच रही है, जिसके कारण वहां श्रमशक्ति, उत्पादकता एवं आर्थिक विकास से जुड़ी नयी चुनौतियां सामने आ रही हैं.
इसके विपरीत भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा एवं गतिशील जनसंख्या है, जो देश के लिए एक अमूल्य जनसांख्यिकीय संपदा है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व की लगभग 840 करोड़ आबादी में लगभग 200 करोड़ युवा (जेन-जेड-), जिनकी आयु 15 से 30 वर्ष के बीच है, निवास करते हैं, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 25 प्रतिशत हैं.
अगर इस युवा शक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार तथा उपलब्ध प्राकृतिक व मानवीय संसाधनों के समुचित उपयोग से जोड़ा जाये, तो भारत के “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने की असीम संभावनाएं हैं.
उन्होंने इस युवा वर्ग को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए संसाधनों के सतत एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया.
स्वागत वक्तव्य और विषय परिचय
कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य एवं विषय परिचय स्नातकोत्तर भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो वासुदेव प्रसाद ने प्रस्तुत किया. उन्होंने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि जनसंख्या एवं संसाधनों के मध्य संतुलन स्थापित करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे.
मंच संचालन, धन्यवाद ज्ञापन और उपस्थित गणमान्य
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ पिंटू कुमार ने किया. उन्होंने मुख्य वक्ता, अतिथियों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक संवाद विद्यार्थियों में शोध एवं नवाचार की नयी दृष्टि विकसित करते हैं.
इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डॉ मौसमी, डॉ प्रीति कुमारी, डॉ नीरज कुमार तथा डॉ विजय कुमार सहित अनेक शोधार्थी एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न समसामयिक जनसंख्या एवं संसाधन संबंधी विषयों पर संवाद भी किया.
