पैदा मुसलमान हुआ, ईसाई ने पाला और फौज में हिंदू बनकर रहा..., मगध यूनिवर्सिटी में बोले राज्यपाल सैयद अता हसनैन

मेरा जन्म मुसलमान परिवार में हुआ, परवरिश ईसाई परिवार में हुई, फौज में मैं हिंदू बनकर रहा और सिखों की संगत मिली, जबकि मेरे इरादे बौद्धों वाले रहे. भारतीय लोकतंत्र और सर्वधर्म समभाव का यह जीवंत उदाहरण शुक्रवार को राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने मगध विश्वविद्यालय (एमयू) के मंच से पेश किया.

बोधगया (कलेंद्र प्रताप की रिपोर्ट). मेरा जन्म मुसलमान परिवार में हुआ, परवरिश ईसाई परिवार में हुई, फौज में मैं हिंदू बनकर रहा और सिखों की संगत मिली, जबकि मेरे इरादे बौद्धों वाले रहे. भारतीय लोकतंत्र और सर्वधर्म समभाव का यह जीवंत उदाहरण शुक्रवार को राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने मगध विश्वविद्यालय (एमयू) के मंच से पेश किया. मौका था विवि के गणित विभाग के सभागार में आयोजित ”भारतीय लोकतंत्र में सर्वधर्म समभाव की भूमिका एवं चुनौतियां” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का.

बद्री विशाल लाल की जय और अमरनाथ के संस्मरण

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राज्यपाल हसनैन ने अपने 40 साल के सैन्य करियर के अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि वे गढ़वाल रेजिमेंट में रहे, जिसका नारा ही ”बद्री विशाल लाल की जय” (भगवान विष्णु को समर्पित) है. उन्होंने अमरनाथ में आठ बार मत्था टेकने और बद्रीनाथ की घंटी की आवाज रिकॉर्ड कर सरहद पर जवानों को भेजने के अपने दिलचस्प संस्मरण भी साझा किए. उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ देश की सरहदों तक सीमित नहीं है. जब सभी धर्मों के लोग एकजुट होकर राष्ट्रहित में काम करते हैं, तभी देश आंतरिक और सामाजिक स्तर पर सही मायनों में सुरक्षित होता है.

विविधता ही भारत की असली शक्ति: डॉ. इंद्रेश

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ इंद्रेश कुमार ने भी मंच से बेबाकी से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत की असली शक्ति यहां की सहिष्णुता और विविधता में निहित है. डॉ. कुमार ने विश्वास जताया कि गया और बोधगया की धरती से निकलने वाली ज्ञान की धारा पूरे विश्व का कल्याण करेगी.

मगध विवि में बोधगया मठ पीठ बनाने की मांग

संगोष्ठी में लखनऊ स्थित काली मंदिर के महंत स्वामी विवेकानंद गिरि ने विभिन्न धार्मिक परंपराओं के समन्वय पर जोर दिया. उन्होंने मुख्य अतिथि से मगध विश्वविद्यालय में ”बोधगया मठ पीठ” स्थापित कर उस पर शोध शुरू कराने का विशेष आग्रह किया. वहीं, लाओस बौद्ध मठ के प्रभारी भिक्षु साईसाना ने भगवान बुद्ध के करुणा संदेश को आज के समय में सबसे प्रासंगिक बताया. एमयू के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विवि की हालिया उपलब्धियों की जानकारी दी. इस खास मौके पर धर्म संस्कृति संगम (गया जी) के प्रतिनिधि, संन्यासी, बौद्ध भिक्षु और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.

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By PRANJAL PANDEY

PRANJAL PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.

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