टेंडर सिंडिकेट का दबाव: उप नगर आयुक्त और सहायक के बीच सरेआम भिड़ंत, गयाजी का निगम कार्यालय बना अखाड़ा

नगर निगम कार्यालय शुक्रवार दोपहर अचानक अखाड़े में तब्दील हो गया. टेंडर निष्पादन के मुद्दे पर उपनगर आयुक्त शशिकांत और सैरात सहायक निशांत कुमार के बीच जमकर तीखी नोकझोंक हुई. बात इतनी बढ़ गयी कि दोनों पक्षों ने पद की गरिमा और मर्यादा को दरकिनार करते हुए एक-दूसरे पर जमकर भड़ास निकाली.

गया (जितेंद्र मिश्र की रिपोर्ट). नगर निगम कार्यालय शुक्रवार दोपहर अचानक अखाड़े में तब्दील हो गया. टेंडर निष्पादन के मुद्दे पर उपनगर आयुक्त शशिकांत और सैरात सहायक निशांत कुमार के बीच जमकर तीखी नोकझोंक हुई. बात इतनी बढ़ गयी कि दोनों पक्षों ने पद की गरिमा और मर्यादा को दरकिनार करते हुए एक-दूसरे पर जमकर भड़ास निकाली. चेंबर के बाहर हो रहे इस वाक युद्ध का शोर इतना तेज था कि पास के बाजार से सब्जी खरीदने आये लोग भी तमाशबीन बन गये. निगम परिसर में सरेआम हुए इस हंगामे से प्रशासनिक कार्यसंस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. जानकारी के अनुसार, आठ मई को केदारनाथ मार्केट और पंचायती अखाड़ा स्टैंड सहित तीन जगहों का टेंडर खुलना था. सहायक निशांत कुमार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली थी. चूंकि नगर आयुक्त छुट्टी पर हैं, इसलिए उनके स्थान पर उप नगर आयुक्त शशिकांत को केवल रुटीन वर्क (दैनिक कार्यों) का प्रभार सौंपा गया है. जब सहायक ने प्रभारी नगर आयुक्त पर निविदा निष्पादन के लिए दबाव बनाया, तो उन्होंने यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि टेंडर फाइनल करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. इसी बात पर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया, जिसने जल्द ही उग्र रूप ले लिया.

निगम में सिंडिकेट और अवैध वसूली की चर्चा

इस हाइ वोल्टेज ड्रामे के बाद निगम कर्मचारियों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं. बताया जा रहा है कि यह पूरी लड़ाई केदारनाथ मार्केट के टेंडर में छिपे मोटे मुनाफे को लेकर है. पिछले कई वर्षों से इस मार्केट का टेंडर नहीं हुआ है और यहां ठेकेदारी के नाम पर विभागीय वसूली का खेल चल रहा है. इस अवैध वसूली में निगम कर्मचारियों के कई गुट और कुछ जनप्रतिनिधियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है. विवाद पर उप नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि वह बिना पावर के टेंडर प्रक्रिया पूरी कर अपना करियर दांव पर नहीं लगा सकते. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारी उन पर इस तरह का अनैतिक दबाव बनायेंगे, तो वे वरीय अधिकारियों से इसकी लिखित शिकायत करेंगे. वहीं, सहायक का तर्क है कि वह नगर आयुक्त के निर्देश पर ही काम कर रहे हैं और टेंडर निष्पादन के लिए पहले से ही कमेटी गठित है. नगर आयुक्त के लौटने के बाद वह केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे.

दो जगह का टेंडर हुआ फाइनल

इस पूरे विवाद के बीच, सैरात सहायक ने बताया कि कमेटी के दो सदस्यों, टाउन प्लानर और आर्किटेक्ट की मौजूदगी में केदारनाथ मार्केट और पंचायती अखाड़ा का टेंडर फाइनल कर लिया गया है. संवेदकों ने पैसा भी जमा कर दिया है. नगर आयुक्त के लौटने के बाद इनका वर्क ऑर्डर जारी किया जायेगा. हालांकि, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सिकरिया मोड़ और डेल्हा बस स्टैंड का टेंडर फिलहाल टाल दिया गया है.

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By PRANJAL PANDEY

PRANJAL PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.

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